अतीक की हत्या की सुपारी दी गई! हत्यारों ने खोले अहम राज, ट्रेनिंग देने वाले 3 संदिग्ध गिरफ्तार
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अतीक की हत्या की सुपारी दी गई! हत्यारों ने खोले अहम राज, ट्रेनिंग देने वाले 3 संदिग्ध गिरफ्तार

Atique Murder Case: जैसे-जैसे अतीक-अशरफ आगे बढ़ते हैं और मीडिया के लोग पास में आते हैं और असद और गुड्डू मुस्लिम को लेकर सवाल पूछते हैं..दोनों के हाथ एक ही हथकड़ी से बंधे हुए होते हैं...बस अतीक के मुंह से कुछ शब्द निकले ही थे की तभी पिस्टल अतीक के सिर के पास आती है और उसके भेजे में गोली मार दी जाती है....

Atiq Murder Case

Atique Murder Case: माफिया अतीक अहमद और अशरफ की हत्या क्यों की गई? लवलेश, सनी और अरुण ने ही आखिर उन दोनों को क्यों मारा? सभी की जुबान पर यही सवाल है.. अब इस दोहरे हत्याकांड में सबसे बड़ा एंगल कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का आ रहा है... यानी अतीक और अशरफ की हत्या सुपारी देकर करवाई गई है...पुलिस इस एंगल से जांच में जुटी है.  माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ को तीनों आरोपियों ने जिस तरह से मौत के घाट उतारा उससे यह तो साफ है कि तीनों शूटर प्रोफेशनल्स हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक बड़े कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की संभावना है..

तीनों आरोपियों के खिलाफ अपराध के कई मामले दर्ज हैं. हमीरपुर के रहने वाले सनी पर 14 से 15 मामले, लवलेश तिवारी के खिलाफ एक लड़की को थप्पड़ मारने का आरोप. ये तीनों आरोपी जेल भी जा चुके हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,सनी हमीरपुर जेल में बंद अपराधी सुंदर भाटी से भी मिल चुका है. ऐसी खबर है कि सन्नी जेल से बाहर आने के बाद सुंदर भाटी गैंग के लिए काम कर रहा था. मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो ये तीनों आरोपी प्रयागराज में मिले थे. 

ये रहा घटनाक्रम
15 अप्रैल को अतीक-अशरफ को मेडिकल के लिए प्रयागराज के अस्पताल लाया जाता है...पुलिस की भारी सुरक्षा के बीच दोनों को रात के करीब साढ़े 10 बजे के करीब वैन में लाया जाता है. वो दोनों उतरते हैं, आसपास पुलिस का घेरा है और कुछ ही दूरी पर मीडियाकर्मियों की भीड़ नजर आती है..जैसे-जैसे अतीक-अशरफ आगे बढ़ते हैं और मीडिया के लोग पास में आते हैं और असद और गुड्डू मुस्लिम को लेकर सवाल पूछते हैं..दोनों के हाथ एक ही हथकड़ी से बंधे हुए होते हैं. बस अतीक के मुंह से कुछ शब्द निकले ही थे की तभी पिस्टल अतीक के सिर के पास आती है और उसके भेजे में गोली मार दी जाती है..दूसरा और तीसरा आरोपी आता है और दनादन गोलियां ब रसाता है..अशरफ और अतीक पर जैसे विदेशी पिस्टल से हमला किया वैसे ये कोई आम व्यक्ति तो नहीं कर सकता. बाकायदा ये प्रोफेश्नल शूटरों का काम ही हो सकता है. 

आइए जानते हैं कि कैसे जुड़ रही इन तीनों आरोपियों की कड़ी...
अगर इसका ताना बाना बुना जाए तो इन तीनों हत्यारों की मुलाकात एनसीआर में हुई थी. अतीक पर हमला करने वाले तीन लोगों के नाम हैं लवलेश, सनी और अरुण ..कानपुर जेल में  सनी और सुंदर गिरोह का शूटर दिनेश भाटी साथ में रहे थे. बात यहीं पर खत्म नहीं हुई, शुरुआती जांच में ऐसा पता भी चला है कि हिस्ट्रीशीटर सनी सिंह जब हमीरपुर जेल में बंद था तो उसी जेल में लवलेश तिवारी एक बार बंद हुआ था. वहीं पर दोनों की दोस्ती हुई थी. जमानत पर छूटने के बाद दोनों आपस में मिले थे.  करीब एक महीने दोनों साथ में रहे थे. पुलिस इस एंगल पर जांच कर रही है कि तीनों हमलावरों को किसी गैंग ने कॉन्ट्रैक्ट किलिंग तो नहीं दी? 

लवलेश-अरुण और सनी की मुलाकात 
लवलेश और अरुण एक-दूसरे को पहले से जानते थे.. इसके बाद लवलेश ने अरुण की मुलाकात सनी से करवाई. ये तीनों प्रयागराज और सोनभद्र भी आते-जाते रहते थे. अतीक की हत्या करने के लिए ये सिर्फ तीनों ही नहीं, इनके साथ बहुत से लोग जुड़े थे.मीडिया वाले कैसे बर्ताव करते हैं, कैसे बात करते हैं इसकी भी बाकायदा ट्रेनिंग ली गई थी. इन तीनों आरोपियों को मीडिया की ट्रेनिंग दोस्तों ने दी. 

14 और 15 अप्रैल की रात... 
हत्या के तीन दिन पहले तीनों प्रयागराज में मिले. ये हॉस्पिटल से कुछ दूरी पर होटल में रूके. कालविन अस्पताल की रेकी की. एक बाइक का इंतजाम किया और लगातार निगरानी औऱ खबरों पर नजर बनाकर रखी. उनके हाव-भाव से किसी को शक नहीं हुआ. पहले इनका प्लान 14 अप्रैल को अतीक को कोर्ट में मारने का था..जब उसमें सफल नहीं हुए तब अगले दिन यानी 15 अप्रैल की योजना बनाई. 

दो नए मोबाइल और दो सिमकार्ड खरीदे.फर्जी आईडी 
15 की रात को पूरा प्लान बनाया..दो नए मोबाइल और दो सिमकार्ड खरीदे.फर्जी आईडी का इंतजाम किया. फिर बाइक लेकर होटल से अस्पताल के लिए निकले जहां पर इनको पहले से ही सूचना थी कि अतीक को मेडिकल चेकअप के लिए लाया जाएगा.  मीडिया वाले बनकर भीड़ का हिस्सा बन गए और अतीक-अशरफ को मौत के घाट उतार दिया. महज कुछ सेकेंड में अतीक के आतंक का खात्मा कर दिया. 

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आराम से किया सरेंडर
अतीक की हत्या करने के बाद बड़े आराम से सरेंडर करना ये दिखाता है कि इन तीनों हमलावरों को हत्या करनी थी और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना था. इसके लिए वह पूरी तरह से तैयार दिख रहे थे. प्रोफेश्नल शूटर्स की तरह इस पूरी घटना को अंजाम दिया.  

सामान्य तरीके से ही व्यवहार करते रहे आरोपी
एसआईटी की कस्टडी रिमांड में शूटर सामान्य तरीके से ही व्यवहार करते रहे, कहीं से भी नहीं लगा कि उन्हें किसी बात का जरा भी खौफ है. यहां तक कि सबसे कम उम्र का शूटर अरुण मुस्कुराता भी रहा. तीनों शूटरों ने खाना भी खाया. 

कॉन्ट्रैक्ट किलिंग 
आज की बात करें तो इन शूटरों के लिए कॉन्ट्रेक्ट किलिंग की बात सामने आ रही है. बाकायदा ट्रेनिंग दी गई. विदेश पिस्तौल अरेंज की गई. खबरें ये भी है कि इनको पहले ही 10 लाख रुपये दिए गए थे. इनके दोस्तों को भी बांदा से गिरफ्तार किया गया है जिन्होंने इनको मीडिया की ट्रेनिंग दी थी.

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