Bassi: बस्सी में भागवत कथा का आयोजन, श्रीकृष्ण रूक्मणी के विवाह में हुई फूलों की बारिश
topStories1rajasthan1442529

Bassi: बस्सी में भागवत कथा का आयोजन, श्रीकृष्ण रूक्मणी के विवाह में हुई फूलों की बारिश

Bassi News: जयपुर के बस्सी उपखंड क्षेत्र के तूंगा कस्बे के पटेल नगर में भागवत कथा का आयोजन. कथावाचन में श्रद्धालुओं को कृष्ण रुक्मणी विवाह ने किया भक्तों को  आनंदित.कथावाचक गोविंद भैयाजी ने कहा कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकती .

Bassi: बस्सी में भागवत कथा का आयोजन, श्रीकृष्ण रूक्मणी के विवाह में हुई फूलों की बारिश

Bassi News: जयपुर के बस्सी उपखंड क्षेत्र में स्थित तूंगा कस्बे के पटेल नगर में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है. श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पंचम दिन कथावाचक ने श्रद्धालुओं को कृष्ण की बाल लीलाओं समेत अन्य प्रसंग सुनाए. कथावाचक गोविंद भैयाजी ने कहा कि भगवान को माखन इसलिए अच्छा लगता है क्योंकि माखन भक्त का प्रतीक है. उन्होंने प्रवचन में कहा कि धनवान व्यक्ति वही है, जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे. परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम, भक्ति के द्वारा ही संभव हो सकती है. गाय की सेवा से 33 करोड़ देवी देवताओं की सेवा हो जाती है.

इस दौरान यजमान बाबूलाल शर्मा, तूंगा थानाधिकारी नरेश मीणा समेत सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहें. भागवत कथा के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कंकर महाराज ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इतिहास में लिखा है कि सनातन धर्म को विदेशियों से बचाने के लिए कितने प्रयास किए गए हैं, ऐसे में वर्तमान समय में भी हमें सनातन धर्म को बचाने के लिए हर संभव प्रयत्न करना चाहिए. कुछ समय पूर्व तक हमारे घरों में गीता, रामायण समेत अन्य धार्मिक ग्रंथों की प्रतिदिन पूजा अर्चना होती थी लेकिन, टीवी के आगमन के बाद सिनेमा ने हमारे धर्म को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है.

श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ में कथावाचन में श्रद्धालुओं को कृष्ण रुक्मणी विवाह समेत अन्य प्रसंग सुनाए गए. कथावाचक गोविंद भैयाजी महाराज द्वारा छठे दिन मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया. कथावाचक गोविंद भैयाजी महाराज ने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक है. भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी है. कथावाचक ने कृष्ण-रुक्मणि विवाह प्रसंग पर बोलते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ था, लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया. इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकती यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक है नहीं तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है. धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत ही प्राप्त हो जाती है.

इस दौरान श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया. भगवान श्रीकृष्ण रूक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया. कथा के दौरान भक्तिमय संगीत ने श्रोताओं को आनंद से परिपूर्ण किया. कृष्ण-रुकमणी की वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई. इस दौरान राष्ट्रीय आध्यात्मिक संत कृष्ण किंकर महाराज, यजमान बाबूलाल शर्मा, आईपीएस अधिकारी डीआईजी जगदीश चंद्र शर्मा, तूंगा सरपंच कृष्णा गुप्ता समेत सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहें.

Reporter - Amit Yadav

यह भी पढे़ं- OBC आरक्षण मुद्दे को लेकर CM से आर-पार की लड़ाई में मंत्री हरीश चौधरी, बोले- हर सीमा को लाघूंगा

Trending news