CG News: फर्जीवाड़ा! 3 महीने की ट्रेनिंग कर बन गए डॉक्टर, स्वास्थ्य विभाग को खबर नहीं
Advertisement
trendingNow1/india/madhya-pradesh-chhattisgarh/madhyapradesh1696254

CG News: फर्जीवाड़ा! 3 महीने की ट्रेनिंग कर बन गए डॉक्टर, स्वास्थ्य विभाग को खबर नहीं

Gorella Pendra Marwahi: छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्रामीण इलाकों में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. यहां युवक-युवतियों को 3 महीने की ट्रेनिंग दिलाकर डॉक्टर बनाया गया है. 

 

 CG News: फर्जीवाड़ा! 3 महीने की ट्रेनिंग कर बन गए डॉक्टर, स्वास्थ्य विभाग को खबर नहीं

दुर्गेश सिंह बिसेन /पेण्ड्रा: आज कल फर्जीवीड़े का मामला खूब सामने आ रहा है. अब हाल ही में जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही के ग्रामीण इलाकों में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. बता दें कि यहां 10वीं 12वीं पास ग्रामीण युवा युवतियों को एक संस्था से ट्रेनिंग दिलाकर गांव के लोगों का इलाज करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है. गांव में क्लिनिक खोलकर युवक- युवतियां बीमार लोगों को दवाई दे रहे हैं. 

स्वास्थय विभाग को नहीं है खबर
3 महीने की ट्रेनिंग के बाद खोले गए इन क्लिनिक का स्वास्थ्य और प्रशासनिक अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं है. हालांकि अब पूरे मामले की जांच की जा रही है. ई-क्लिनिक खोलकर युवक युवतियां एमबीबीएस और बीएएमएस डॉक्टरों द्वारा प्रिसक्राइब की जाने वाली दवाइयां दे रहे हैं.

पेशेंट केयर असिस्टेंट के पद पर किया गया भर्ती 
इन युवक-युवतियों को पेशेंट केयर असिस्टेंट के पद पर भर्ती किया गया है. दरअसल, इन ग्रामीण युवक-युवतियों को एक विज्ञापन के जरिए ग्रामीण इलाकों में पेशेंट केयर असिस्टेंट के पद पर सीधी भर्ती कर ₹13000 प्रतिमाह देने की बात कही गई है.

बिलासपुर से दिया गया ट्रेनिंग
ग्रामीण युवक-युवतियों को बिलासपुर के नरेश हेल्थ केयर नाम की संस्था के द्वारा ट्रेनिंग दिया गया है. इस ट्रेनिंग में मलेरिया, टाइफाइड, सर दर्द, बदन दर्द, बुखार, स्त्री रोग जैसी बीमारियों के बारे में सिखाया गया है, ताकि पेशेंट केयर असिस्टेंट ग्रामीण इलाकों के लोगों का इलाज कर सके. इसके लिए उन्हें इंजेक्शन और दवाइयां भी दी गई हैं.

यह भी पढ़ें: Balodabazar News: बलौदाबाजार में भीषण सड़क हादसा, 6 लोगों की मौत

 

30 से 35 हजार रुपये देकर की ट्रेनिंग
पेशेंट केयर असिस्टेंट के पद पर भर्ती हुई युवतियों ने बताया कि, उन्होंने ₹30 से 35 हजार रुपये महीना देकर 3 महीने की ट्रेनिंग की है. ये युवतियां खुद का क्लिनिक खोलकर बैठी हैं, लेकिन  प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है. इस खबर को सुनकर हर कोई हैरान हो गया है. अनुविभागीय अधिकारी ने पूरे मामले की जांच के लिए सीएमएचओ को निर्देश दिया है. इस मामले में डॉक्टरों का कहना है कि क्या तीन महीने की ट्रेनिंग से कोई डॉक्टर बन जाएगा. यहां लोग कई साल मेहनत करते हैं.

Trending news