दमोह जिले के गैसाबाद पंचायत में जहां त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के बाद अनुसूचित वर्ग की महिला सरपंच चुनी गई तो पंचायत में करीब 11 महिला पंच भी निर्वाचीत हुई. लेकिन जब शपथ लेने की बारी आई तो कार्यक्रम से गायब महिला सरपंच और बाकी महिला पंचों की जगह गांव के सचिव ने उनके पतियों को माइक पर बुलाया और शपथ दिलाई.
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दमोह: एमपी गजब है...! ये स्लोगन कई बार जमीन पर हकीकत में देखने को मिल जाता है. इस बार अजब-गजब खेल में सरकारी तंत्र ने लोकतंत्र को ही मजाक बना दिया और इस कृत्य ने चिंता ही नहीं बढ़ाई बल्कि सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े कर दिए. मामला चुनी हुई महिला सरपंच और महिला पंचों के शपथ लेने का है. जहां उनकी जगह उनके पतियों को बाकायदा कार्यक्रम में सरेआम शपथ दिलाई गई और हद तो तब हो गई जब इस शपथ ग्रहण समारोह में तक महिलाएं मौजूद नहीं रही.
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दरअसल मामला दमोह जिले के गैसाबाद पंचायत का है. जहां त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के बाद अनुसूचित वर्ग की महिला सरपंच चुनी गई तो पंचायत में करीब 11 महिला पंच भी निर्वाचीत हुई. नियमानुसार चुनी हुई सरपंच और बाकी महिलाओं को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जानी थी. जिसके लिए ग्राम पंचायत में कार्यक्रम किया गया, लेकिन जब शपथ लेने की बारी आई तो कार्यक्रम से गायब महिला सरपंच और बाकी महिला पंचों की जगह गांव के सचिव ने उनके पतियों को माइक पर बुलाया और शपथ दिलाई.
जब मामले का वीडियो सामने आया तो हड़कम्प मच गया. व्यवस्था की जमीनी हकीकत सबके सामने आ गई. मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, तो जिला प्रशासन हरकत में आया है. जिला पंचायत के सीईओ अजय श्रीवास्तव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए घटनाक्रम पर मुहर लगाते हुए सरपंच और पंचों को फिर से शपथ दिलाई है. वहीं मामले की जांच के आदेश दिये हैं.
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श्रीवास्तव के मुताबिक ऐसा होना नियमों के खिलाफ है और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी. वहीं सारे घटनाक्रम ने ये साबित कर दिया है कि सरकारों की लाख कोशिशों के बाद भी व्यवस्था अब भी दुरुस्त नहीं है.