कभी इंदिरा गांधी को हटाने की मुहिम में शामिल, अब क्यों कांग्रेस के साथ के लिए हैं लालायित!
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कभी इंदिरा गांधी को हटाने की मुहिम में शामिल, अब क्यों कांग्रेस के साथ के लिए हैं लालायित!

बिहार से लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को हराने के लिए विपक्षी एकता की मशाल लेकर नीतीश विपक्षी दलों को एकजुट करने निकले हैं.

(फाइल फोटो)

Opposition Unity: बिहार से लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को हराने के लिए विपक्षी एकता की मशाल लेकर नीतीश विपक्षी दलों को एकजुट करने निकले हैं. इसमें से जितने भी क्षेत्रीय दल को नीतीश भाजपा के खिलाफ इकट्ठा कर पाएंगे हैं उन्होंने एक समय पर कांग्रेस की उस जमीन को हथिया कर अपनी राजनीति वहां से चमकाई और आज वह कांग्रेस के साथ ही हाथ मिलाने को लालायित हैं. आपको बता दें कि इसमें से इंदिरा गांधी के आपातकाल के दौर का विरोध करनेवाले कई नेता हैं जिनकी अपनी पार्टियां हैं और आज वह कांग्रेस के साथ एक मंच पर आने को तैयार हैं. बिहार में ही जहां से यह विपक्षी एकता के सुर उभरे हैं वहीं से इंदिरा के खिलाफ एक संपूर्ण क्रांति की मशाल लेकर लोकनायक जयप्रकाश नारायण निकले थे और तब लालू, नीतीश, रामविलास समेत कई नेता उस आंदोलन में शामिल हुए थे. आज ऐसी क्या मजबूरी आन पड़ी की इन नेताओं की पार्टियों को कांग्रेस के साथ आना मजबूरी हो गई है. 

25 जून 1975 को जब इंदिरा ने देश में आपतकाल की घोषणा की उससे एक साल पहले 5 जून 1974 को ही लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा के खिलाऱ संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था. विपक्ष की आवाज को इंदिरा ने आपातकाल लगाकर दबाने की भरसक कोशिश की लेकिन उनकी पार्टी कांग्रेस के पांव उखड़ गए. 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने जो कारनामा किया वह इंदिरा और कांग्रेस दोनों को पचाना मुश्किल थे. आज भी 5 जून को गैर कांग्रेसी खासकर जेपी और लोहिया की विचारधार के समर्थक दल संपूर्ण क्रांति दिवस मनाते हैं और फिर बिहार में 12 जून को इन्हीं में से कई दल इस बार कांग्रेस का साथ पाने के लिए बैठक करनेवाले थे. वह भी केवल और केवल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए.  

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जब इंदिरा के खिलाफ बिहार में जेपी ने छात्रों की अगुवाई की थी तो वह उस समय सक्रिय राजनीति से दूर समाजसेवा के कार्य में लगे हुए थे. छात्रों की विनती पर वह आंदोलन की अगुवाई करने के लिए तैयार हो गए. देशभर के कई राज्यों में इंदिरा के खिलाफ गुस्सा लोगों में भरा पड़ा था. जेपी ने इस आंदोलन में लोहिया की सप्त क्रांति को आधार बनाया और इंदिरा के खिलाफ बड़ी भीड़ को लेकर निकल पड़े. लालू यादव, नीतीश कुमार, सुशील मोदी, रामविलास पासवान, शिवानंद तिवारी, शरद यादव जैसे नेता इसी आंदोलन की उपज थे. 

हालांकि तब जेपी को चंद्रशेखर ने एक पत्र लिखकर इस बात की आशंका जताई थी कि ये जो नेता आपके साथ आ रहे हैं ये सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं आ रहे ना ही ये व्यवस्था बदलने के ख्वाहिशमंद हैं. ये आने वाले समय में सत्ता की चाह रखने वाले हैं और अपनी-अपनी जातियों के नेता बनने वाले हैं. यही हुआ भी आज आपके सामने पूरी तस्वीर साफ है लालू, मुलायम, नीतीश, चौधरी चरण सिंह के साथ उस दौर के तमाम नेता अपनी-अपनी जातियों के नेता बन गए और फिर इन्होंने सत्ता के आसन पर काबिज होने के लिए जो-जो किया वह किसी से छुपा नहीं है. ऐसे में अगर ये भाजपा को सत्ता से बेदख्ल करने के लिए कांग्रेस के साथ खड़े भी हो जाएं तो यह मान लेना कि यह जेपी के संपूर्ण क्रांति के उद्घोष को जी रहे हैं. ऐसा समझना एकदम गलत होगा. क्योंकि तब जयप्रकाश नारायण को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने जो खत लिखा था वह आज भी शत-प्रतिशत सही नजर आ रहा है.  

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