Kargil Ke Hero: शहीद नीरज की पत्नी रूबी को इस बात का आज भी है मलाल, याद करके भर आईं आंखें
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Kargil Ke Hero: शहीद नीरज की पत्नी रूबी को इस बात का आज भी है मलाल, याद करके भर आईं आंखें

Kargil Martyr Neeraj Kumar: लखीसराय के नीरज कुमार सिंह कारगिल युद्ध के दौरान 12 जुलाई 1999 को शहीद हो गए थे. कारगिल युद्ध के दौरान नीरज हथियार और गोली बारूद पहुंचाने का काम कर रहे थे. उसी दिन सुबह 7:30 बजे धनासक क्षेत्र में दुश्मनों द्वारा छोड़े गए तोप के गोले से नीरज वीरगति को प्राप्त हो गए. नीरज के बलिदान के बाद भारत सरकार से लेकर राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तक ने परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की थी.

कारगिल शहीद नीरज कुमार (File Photo)

Kargil Martyr Neeraj Kumar: 'शहीदों की चिताओं पर हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यहीं बाकी निशां होगा', कारगिल विजय दिवस के 25 वर्ष पूरे हो गए. देश में 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पूरे शौर्य के साथ मनाया जाता है. इस मौके पर कारगिल के वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी जाती है, लेकिन लखीसराय जिला प्रशासन हर साल इससे अंजान बना रहता है. बलिदानी के घर में एक दीया तक जलाने आज तक न कोई अधिकारी और न ही जनप्रतिनिधि पहुंचाते है. नीरज के बलिदान की गाथा सिर्फ़ समाचार में बनकर ही रह जाती है. उसे पढ़कर और सुनकर ही मैं खुद को देश की वीरांगना होने का गौरव प्राप्त करती हूं. ये टीस है कारगिल के बलिदानी नीरज की अर्धांगनी रूबी देवी की. इकलौती बेटी के अलावा रूबी के परिवार में और कोई नहीं है. इस कारण अपने हाल पर जीने को उसने मजबूरी मान ली है.

लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड अंतर्गत सिंगापुर निवासी नीरज कुमार सिंह कारगिल युद्ध के दौरान 12 जुलाई 1999 को शहीद हो गए थे. वे बटालिक सेक्टर 22 ग्रेनिडियर्स के नंबर 268626 के 5वीं नायक के पद पर कार्यरत थे. कारगिल युद्ध के दौरान नीरज हथियार और गोली बारूद पहुंचाने का काम कर रहे थे. उसी दिन सुबह 7:30 बजे धनासक क्षेत्र में दुश्मनों द्वारा छोड़े गए तोप के गोले से नीरज वीरगति को प्राप्त हो गए. उन्हें वीर शहीद सम्मान भी मिला. नीरज के बलिदान के बाद भारत सरकार से लेकर राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तक ने परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की थी. कई वायदे और घोषणाएं भी की गईं. 

रूबी देवी को सिंगारपुर गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में सहायक शिक्षिका की नौकरी तो मिल गई, लेकिन सरकार की घोषणा के बाद भी विद्यालय का नामाकरण नीरज के नाम पर नहीं हुआ है. तत्कालीन रेलमंत्री नीतिश कुमार ने कजरा और किऊल स्टेशन के बीच रामपुर और सिंगारपुर गांव के मध्य बलिदानी नीरज के नाम पर हॉल्ट बनाने की घोषणा की थी. आज तक यह पूरी नहीं हुई. रेलवे हॉल्ट के पास से सिंगारपुर गांव जाने वाली सड़क पर बना शहीद द्वार भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया. यह आज भी उपेक्षित पड़ा है. गांव में नीरज के नाम पर सामुदायिक भवन का निर्माण भी भ्रष्टाचार के कारण पूरा नहीं हो सका. इसका मलाल रूबी देवी को आज भी है.

नीरज अपने माता-पिता का इकलौते पुत्र थे. अब उनकी इकलौती पुत्री सुमन ही उनके खानदान की अकेली चिराग है. अपनी शिक्षिका मां के सहारे वीर पिता के सपने को पूरा करने में सुमन लगी है वह बेंगलुरु में स्नातक की पढ़ाई कर रही है. रूबी देवी ने बताया कि जिला प्रशासन सरकारी कार्यक्रम या फिर राष्ट्रीय त्योहार के अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित को याद कर सम्मानित करता है, लेकिन कारगिल विजेता के परिजनों की कभी खोज नहीं करता.

अब सरकार के घोषणाओं और आश्वासन पर से शहीद के परिवार को भरोसा डठ सा गया है. उन्होनें कहा कि परिवार के लोगों के बीच बातचीत चल रही है कि अगर सरकार शहीद द्वार या शहीद स्मारक को पूरा नहीं करती है तो स्वयं एवं समाज के लोगों के सहयोग से इसे पूरा किया जाय.

रिपोर्ट: राज किशोर मधुकर 

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