Haryana: 71 वर्षीय डॉ. सेठी ने पूरी की 102वीं मैराथन; लोगों को भी दिया फिटनेस मंत्र
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Haryana: 71 वर्षीय डॉ. सेठी ने पूरी की 102वीं मैराथन; लोगों को भी दिया फिटनेस मंत्र

Kurukshetra: हरियाणा के रहने वाले डॉक्टर सोमनाथ सेठी को कौन नहीं जानता. दौड़ने के जुनून ने उन्हें न सिर्फ़ मशहूर किया बल्कि वह कई मैराथन में हिस्सा लेकर इनाम भी हासिल कर चुके हैं.

Haryana: 71 वर्षीय डॉ. सेठी ने पूरी की 102वीं मैराथन; लोगों को भी दिया फिटनेस मंत्र

Haryana: किसी भी शौक़ या जुनून का उम्र से कोई संबंध नहीं होता, अगर आपको कोई काम करने का जुनून है तो आप हर क़ीमत पर उसको पूरा करके ही दम लेंगे. इन्हीं लोगों में  हरियाणा के कुरुक्षेत्र के मशहूर डॉक्टर सोमनाथ सेठी का नाम भी शामिल है. डॉ सेठी को दौड़ने और उससे संबंधित अलग-अलग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए जाना जाता है. डॉक्टर सेठी अब तक 102 मैराथन और हाफ- मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं . पिछले हफ़्ते चंडीगढ़ में आयोजित टफमैन मैराथन में उन्होंने 60 से अधिक आयु वर्ग में तीसरा नंबर हासिल किया था, यह उनकी 102वीं मैराथन थी.

102 मैराथन पूरी कीं

अपने जुनून के बारे में सेठी ने बताया कि उन्होंने अब तक कुल 102 मैराथन में दौड़ लगाई हैं जिसमें 42.2 किलोमीटर वाली 16 पूर्ण मैराथन शामिल हैं जबकि 50 किलोमीटर वाली एक अल्ट्रा मैराथन और 21.1 किलोमीटर वाली 85 हाफ मैराथन में उन्होंने हिस्सा लिया.  इससे पहले डॉ सेठी ने कुरुक्षेत्र में अपनी 100वीं मैराथन पूरी की थी. उनका कहना है कि वह हमेशा अपने मरीज़ों को दवाओं पर डिपेंड रहने के बजाय अपने शारीरिक स्वास्थ्य का ज़्यादा ध्यान रखने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं.

यादें को शेयर किया

डॉ सेठी ने बताया कि उनके लिए सबसे यादगार प्रोग्राम बोस्टन और सिंगापुर मैराथन थे. पिछले साल बोस्टन मैराथन में 70-75 साल की उम्र में उन्हें 31वां रैंक हासिल हुआ था. सेठी हमेशा एक उत्साही धावक, पैदल चाल एथलीट और शारीरिक व्यायाम के दृढ़ समर्थक रहे हैं. उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए बताया कि वह नियमित तौर से पांच किमी से 10 किमी दौड़ लगाते थे. डॉ सेठी कई 'वॉकिंग रेस' में हिस्सा ले चुके हैं. उन्हें 'रेस वॉकर' का चैंपियन भी नामित किया गया.

नहीं हारी हिम्मत

डॉ सेठी ने 2011 में एक अफसोसनाक ख़बर के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की सड़कों पर दौड़ते वक़्त एक हादसे में उनके बाएं पैर और छह पसलियों में फ्रैक्चर हो गया था, जिसकी वजह से वह तीन महीने से भी ज़्यादा वक़्त के लिए बिस्तर पर पड़े रहे थे. सेठी की सर्जरी करने वाले डॉ ने उन्हें दौड़ नहीं लगाने की सलाह देते हुए कहा था कि "बिना मदद के चलने में सक्षम होना भी उनके लिए एक चमत्कार होगा" हालांकि, सेठी ने इस भविष्यवाणी के आगे झुकने से इनकार कर दिया. ठीक होने के बाद भी उन्होंने अपना सफ़र जारी रखा. 

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