जायज मकसद के लिए कमाई करना भी है इबादत, कारोबार पर क्या कहता है इस्लाम?
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जायज मकसद के लिए कमाई करना भी है इबादत, कारोबार पर क्या कहता है इस्लाम?

Islamic Knowledge: इस्लाम में हलाल तरीके कमाई करने को बेहतर बताया गया है. अगर आप अच्छा खाते हैं और अच्छा पहनते हैं तो यह गलत नहीं है. 

 

जायज मकसद के लिए कमाई करना भी है इबादत, कारोबार पर क्या कहता है इस्लाम?

Islamic Knowledge: इस्लाम में मुलाजमत से बेहतर कारोबार करने को बताया गया है. इस बात की ताकीद की गई है कि आप हलाल तरीके से मेहनत से कमाई करें. अगर आप अपने कारोबार के लिए भागते-दौड़ते हैं, मेहनत करते हैं और उससे अपने बच्चों और मां-बाप की परवरिश करते हैं, तो यह भागदौड़ और कोशिश अल्लाह की राह में शुमार की जाएगी.

कारोबार पर हदीस
एक हदीस में आता है कि "काब इब्ने उजरा (रजि.) कहते हैं कि नबी (स.) के पास से एक शख्स गुजरा (जो मेहनत-मजूदूरी के लिए जा रहा था). आप (स.) के पास बैठे लोगों ने उसकी मेहनत और भाग-दौड़ देखकर कहा, " ऐ अल्लाह के रसूल! अगर इस शख्स की दिलचस्पी और भाग-दौड़ अल्लाह की राह में होती तो कितना अच्छा होता ?" 

आप (स.) ने फरमाया, "अगर वह अपने छोटे बच्चों की परवरिश के लिए दौड़ धूप कर रहा है तो यह कोशिश भी अल्लाह की राह में शुमार की जाएगी. अगर वह बूढ़े मां-बाप की परवरिश के लिए कोशिश कर रहा है तो यह भी अल्लाह के लिए किया गया काम समझा जाएगा और यदि वह अपने निजी और व्यक्तिगत काम के लिए दौड़-धूप कर रहा है और मकसद यह है कि लोगों के सामने हाथ न फैलाना पड़े, तो यह भी अल्लाह के लिए किया गया काम समझा जाएगा. लेकिन अगर इस कोशिश का मकसद यह हो कि लोगों पर आपने माल-दौलत की बरतरी जताए और लोगों के सामने अपनी खुशहाली की नुमाइश करे, तो उसकी यह सारी कोशिश और मेहनत शैतान की राह में शुमार होगी." (हदीस- अल-मुंजिरी)

कमाई के बारे में अहम बातें
इस्लाम में नीयत बहुत मायने रखती है. अच्छी नीयत पूरी जिंदगी और उसमें किए गए सारे काम को इबादत बना देती है, जबकि बुरी नीयत अच्छे कामों को भी गुनाह बना देती है.
कमाई के बारे में एक जगह इरशाद है कि जायज तरीके से माल कमाओ. अगर आप गरीब या मिस्कीन रहोगे तो आपके ईमान से सौदा किया जा सकता है.
इस्लाम में बताया गया है कि देने वाला हाथ लेने वाले हाथ से बेहतर होता है. इसका मतलब यह है कि आप कमाई करके लोगों की मदद करने वाले बनिए.
इल्लाम में ये भी बताया गया है कि अगर आपके पास माल और दौलत नहीं होगी तो आप किसी के पास मोहताज बनकर जाएंगे, वह आपसे गलत काम करवा सकता है. इस्लाम में ये बताया गया है कि अगर आप अच्छा खाते हैं और अच्छा पहने हैं, तो यह फिजूलखर्ची नहीं है. शर्त ये है कि आपका कमाया माल जायज हो.

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