उपराष्ट्रपति पद के लिए एक 'चायवाले’ ने भी भरा पर्चा; जानिए, कैसे होता है चुनाव ?
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उपराष्ट्रपति पद के लिए एक 'चायवाले’ ने भी भरा पर्चा; जानिए, कैसे होता है चुनाव ?

vice-presidential election 2022: उपराष्ट्रपति पद के नामांकन के पहले दिन ‘रामायणी चायवाला’ सहित पांच उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है. देश के नए उपराष्ट्रपति 11 अगस्त को शपथ लेंगे.

अलामती तस्वीर

नई दिल्लीः अगले माह छह अगस्त को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मंगलवार को नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही दिन आनंद सिंह कुशवाहा ऊर्फ ‘‘रामायणी चायवाला’’ सहित पांच उम्मीदवारों के नामांकन पत्र दाखिल किए गए. एक उम्मीदवार का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया, क्योंकि एक वह एक जरूरी दस्तावेज सौंपने में विफल रहे. नोटिफिकेशन के मुताबिक, नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 19 जुलाई है.

नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 22 जुलाई 
गौरतलब है कि मौजूदा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को खत्म हो रहा है. देश के नए उपराष्ट्रपति 11 अगस्त को शपथ लेंगे. नामांकन पत्रों की जांच 20 जुलाई को की जाएगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 22 जुलाई रखी गई है. आंकड़ों के लिहाज से उपराष्ट्रपति ओहदे के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का पलड़ा भारी है. राजनीतिक दलों ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है. 

आज दाखिल सभी पर्चे के खारिज होने की संभावना 
निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु के सलेम जिले के के पद्मराजन, अहमदाबाद के परेशकुमार नानूभाई मुलानी, बेंगलुरु के होसमत विजयानंद और आंध प्रदेश के एन राजशेखर श्रीमुखलिंगम ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए है. नामांकन पत्र दाखिल करने वालों में मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले ‘रामायणी चायवाला’ भी शामिल हैं. कुशवाहा ने नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए अनिवार्य 15,000 रुपए की जमानत की रकम जमा नहीं की है. हालांकि, इसके बावजूद उनके नामांकन पत्र को स्वीकार कर लिया गया है. इन सभी नामांकन पत्रों को खारिज कर दिए जाने का पूरा इमकान है, क्योंकि उनके नामांकन पत्रों में 20 प्रस्तावकों और 20 अनुमोदकों के दस्तखत नहीं हैं.

इस विधि से होता है उपराष्ट्रपति का चुनाव 
इस चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मतदान करने के हकदार हैं. मनोनीत सदस्य भी इस चुनाव में अपना मत डाल सकते हैं. उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के 788 सदस्य शामिल होते हैं. चूंकि, निर्वाचक मंडल के सभी सदस्य, संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं, इसलिए प्रत्येक संसद सदस्य के मत का मूल्य समान यानी एक होगा. चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के मुताबिक एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होगा और चुनाव गुप्त मतदान के द्वारा होगा. इस प्रणाली में, निर्वाचक को उम्मीदवारों के नामों के सामने वरीयताएं अंकित करनी होती है. 

15,000 रुपये है चुनाव के लिए जमानत राशि 
इस चुनाव में खुले मतदान की कोई अवधारणा नहीं है और राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में किसी भी हालत में किसी को भी मतपत्र दिखाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. उम्मीदवार के नामांकन पत्र में 20 प्रस्तावकों और 20 अनुमोदकों के दस्तखत होने चाहिए. एक निर्वाचक या तो प्रस्तावक या अनुमोदक के रूप में उम्मीदवार के सिर्फ एक नामांकन पत्र पर अपना दस्तखत कर सकता है. एक उम्मीदवार ज्यादा से ज्यादा चार नामांकन पत्र दाखिल कर सकता है. चुनाव के लिए जमानत राशि 15,000 रुपये है. मतदान कक्ष में वोट पर निशान लगाने के बाद मतदाता को मतपत्र को मोड़कर मतपेटी में डालना होता है. मतदान प्रक्रिया के किसी भी उल्लंघन पर पीठासीन अधिकारी द्वारा मतपत्र को रद्द कर दिया जाएगा.

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