देश में बढ़ सकती है इन सामानों की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ कमजोर

डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट जारी है. शुक्रवार को 1 डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 78.20 रुपये पर थी. डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमतों के चलते विदेश से आयात होने वाले सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jun 24, 2022, 04:51 PM IST
  • डॉलर के मुकाबले निचले स्तर पर है रुपया
  • 78.32 के निचले स्तर पर बंद हुआ था रुपया
देश में बढ़ सकती है इन सामानों की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ कमजोर

नई दिल्लीः डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट जारी है. शुक्रवार को 1 डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 78.20 रुपये पर थी. डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमतों के चलते विदेश से आयात होने वाले सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है. 

डॉलर के मुकाबले निचले स्तर पर है रुपया
हालांकि, शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपये में थोड़ा सुधार देखने को मिला. शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से सुधार दर्ज करते हुए 12 पैसे मजबूत होकर 78.20 पर पहुंच गया. लेकिन रुपया अभी भी निचले स्तर पर है. 

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 78.20 पर खुला, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 12 पैसे की बढ़त दर्शाता है. शुरुआती सौदों में यह 78.19 के ऊंचे स्तर और 78.24 के निम्न स्तर तक गया. 

78.32 के निचले स्तर पर बंद हुआ था रुपया
बृहस्पतिवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 78.32 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था. इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.16 प्रतिशत गिरकर 104.26 पर आ गया. वैश्विक तेल सूचकांक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.21 प्रतिशत फिसलकर 109.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.

कौन-कौनसी वस्तुएं हो सकती हैं महंगी
विदेश से आयात होने वाली वस्तुएं मसलन, कच्चा तेल, पाम ऑयल, इम्पोर्टेड कॉस्मेटिक्स, लग्जरी गाड़ियां और गुड्स समेत अन्य सामानों की कीमतें बढ़ने के आसार हैं. इससे देश में महंगाई का स्तर भी बढ़ने की आशंका बनी हुई है.

जानिए देश में महंगाई की दर क्या है
खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में आठ साल के उच्च स्तर 7.79 प्रतिशत रही थी. इसी तरह मई में थोक महंगाई दर 15.08 फीसदी रही. वहीं, महंगाई दर चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में छह प्रतिशत से ऊपर बने रहने की आशंका है. 

बता दें कि आरबीआई को खुदरा महंगाई दो से छह प्रतिशत के दायरे में रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है. आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2022-23 में आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7.2 प्रतिशत पर बरकरार रखा है. 

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