Pushpa 2: यूपी के इस जिले में दोहराई जा रही पुष्पा फिल्म की कहानी, लकड़ी माफिया बने डायरेक्टर
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Pushpa 2: यूपी के इस जिले में दोहराई जा रही पुष्पा फिल्म की कहानी, लकड़ी माफिया बने डायरेक्टर

Tiloi Jungle: एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार ने धरती को हरा-भरा करने के लिए मुहिम चला रखी है. योगी सरकार पर्यावरण को सही करने के लिए हर साल जिले में लाखों रुपये खर्च कर पौधारोपण कर रही है. वहीं, दूसरी तरफ विभाग और पुलिस की मिलीभगत से लकड़ी के ठेकेदारों द्वारा लगातार हरियाली पर आरा चल रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

अमेठी: अगर आपने पुष्पा फिल्म देखी है तो उसमें जिस जंगल की कहानी बताई जाती है, उसका नाम है शेषाचलम. यह जंगल ही लाल चंदन की तस्करी के लिए फेमस है, यहां चंदन की लकड़ी की तस्करी होती है, लेकिन आज हम आपको यूपी के एक ऐसे ही जिले की कहानी बताएंगे जहां पुष्पा-2 फिल्म की शूटिंग चल रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस घने जंगल की आड़ में रियल लाइफ शूटिंग चल रही है जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. यह कहानी है उत्तर प्रदेश के अनेठी जिले के तिलोई तहसील क्षेत्र की.  

मिलीभगत से हरियाली पर चल रहा आरा  
जी हां, एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार ने धरती को हरा-भरा करने के लिए मुहिम चला रखी है. योगी सरकार पर्यावरण को सही करने के लिए हर साल जिले में लाखों रुपये खर्च कर पौधारोपण कर रही है. वहीं, दूसरी तरफ विभाग और पुलिस की मिलीभगत से लकड़ी के ठेकेदारों द्वारा लगातार हरियाली पर आरा चल रहा है. इतना ही नहीं कई बार शिकायत करने के बावजूद भी वन विभाग और पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है.

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आपको अक्सर जिले में कहीं न कहीं लकड़हारे प्रतिबंधित पेड़ों को काटते हुए दिखाई पड़ जाएंगे. ऐसा ही एक मामला इन दिनों सामने आया है, जहां सरकार से बेखौफ होकर हरे-भरे पेड़ पौधों को लहूलुहान किया जा रहा है और सरकार की पर्यावरण सुधार के लिए की जा कोशिश को ठेंगा दिखाया जा रहा है.  

लकड़ी कारोबारियों के लिए तिलोई सुरक्षित जगह
तिलोई क्षेत्र में इन दिनों हरियाली पर बड़ी ही निडरता से आरा चलाया जा रहा है. अधिकारी इस पर अंकुश लगाने में नाकामयाब है या अंकुश लगाना नहीं चाहते है यह बड़ा सवाल है. लकड़ी के व्यवसायियों के लिए तिलोई महफूज जगह बनती जा रही है. आए दिन लकड़कट प्रतिबंधित पेड़ों को काटते दिखाई देते हैं.   

फल फूल रहा लकड़ी कारोबारियों का कारोबार 
दरअसल, मामला तिलोई विधानसभा के मोहनगंज थाना क्षेत्र के ग्राम सभा का है. जहां 2 बीघे के बाग में लकड़ी के ठेकेदार द्वारा आम, महुआ, गूलर, शीशम और जामुन के पेड़ मिला कर लगभग 15 वृक्षों को धराशायी कर दिया गया. वहीं, जब ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग में शिकायत की तो अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की और न ही मौके पर पहुंच कर जांच की. वन विभाग और पुलिस की कृपा से लकड़ी कारोबारियों का कारोबार फल फूल रहा है. 

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प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों को काटा जा रहा
जिले की चारों विधानसभा के गांवों में आए दिन आम, महुआ जैसे फलदार वृक्षों पर आरे चलते दिखाई देते हैं. वहीं, भागीरथपुर में शीशम, गूलर समेत अन्य प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों को काट दिया गया है. जब इस पूरे प्रकरण में सीओ डॉ अजय कुमार सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि प्रकरण संज्ञान में है. वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दे दी गई है और जांच कर दोषी व्यक्तियों के ऊपर कार्रवाई की जाएगी.

कहां किया जाता है लकड़ियों का इस्तेमाल
लकड़ियों का इस्तेमाल आलीशान फर्नीचर बनाने में किया जाता है. नक्काशीदार वुडन का सामान बनाने के लिए इन लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. आजकल अधिकतर लोग लकड़ी से बनी चीजों की ओर आकर्षित होते है. वाद्य यन्त्रों, चारपाई के पांव, जूतों की एड़ी, हथौड़े की बेंत के निर्माण में होता है. ये इमारती लकड़ियां होती हैं. वहीं, शीशम की लकड़ी में तो कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं. 

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