सुभासपा विधायक बेदीराम सहित 18 को कोर्ट से नहीं मिली राहत, 18 साल पुराना रेलवे भर्ती परीक्षा का पेपर लीक मामला
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सुभासपा विधायक बेदीराम सहित 18 को कोर्ट से नहीं मिली राहत, 18 साल पुराना रेलवे भर्ती परीक्षा का पेपर लीक मामला

UP Paper Leak Case: सुभासपा विधायक बेदीराम और निषाद पार्टी के विधायक विपुल दुबे की मुश्किलें बढ़ गई हैं. 2006 के रेलवे में ग्रुप डी की परीक्षा के पेपर लीक मामले में MP/MLA गैंगस्टर कोर्ट ने आरोप तय कर दिये हैं.

सुभासपा विधायक बेदीराम सहित 18 को कोर्ट से नहीं मिली राहत, 18 साल पुराना रेलवे भर्ती परीक्षा का पेपर लीक मामला

UP Paper Leak Case: 2006 में रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा में सेंधमारी कर पेपर लीक करने के मामले में सुभाषपा विधायक बेदी राम और निषाद पार्टी के विधायक विपुल की मुश्किलें बढ़ गई हैं. गुरुवार को एमपी एमएलए गैंगस्टर कोर्ट में बेदी राम, विपुल दुबे और अन्य 16 आरोपियों को पेश किया गया. आरोपियों की ओर से कोर्ट में डिस्चार्ज अर्जी दाखिल की गई, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया. कोर्ट ने सभी आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं जिसके बाद मामले का ट्रायल शुरू हो गया है. 

इस मामले में एसटीएफ द्वारा की गई जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी

2006 का है पेपर लीक मामला
2006 में रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा में पेपर लीक की घटना ने पूरे देश को हिला दिया था. इस मामले में एसटीएफ ने व्यापक जांच की और साक्ष्यों के आधार पर विधायक बेदी राम, विधायक विपुल दुबे सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया. एसटीएफ ने इनके खिलाफ कृष्णा नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी. इसके बाद सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी.

विधायकों का बयान
विधायक बेदी राम और विधायक विपुल दुबे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया और न्याय की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि वे निर्दोष हैं और न्यायालय में यह साबित करेंगे. 

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एसटीएफ की कार्यवाही

एसटीएफ के अनुसार, 2006 में हुए पेपर लीक मामले में जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले थे. इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी की गई और उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की गई. एसटीएफ ने बताया कि पेपर लीक के इस मामले में बड़ी साजिश का खुलासा हुआ था, जिसमें कई बड़े नाम शामिल थे.

आरोप तय, ट्रायल शुरू
अब इस मामले में कोर्ट ने आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं और ट्रायल शुरू हो चुका है. कोर्ट में मामले की सुनवाई नियमित रूप से होगी और न्याय प्रक्रिया के तहत सभी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे. इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की नजरें कोर्ट की कार्यवाही पर हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय किस निष्कर्ष पर पहुंचता है. इस मामले ने शिक्षा प्रणाली में सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्हें सुलझाने की दिशा में यह ट्रायल एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

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