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राजस्थान में इस पेटिंग के बिना अधूरी मानी जाती है शादी, सालों से निभाई जा रही है यह परंपरा

राजस्थान की धार्मिक नगरी कहे जानें वाले शहेर करौली,अपने आंचल में परंपराओं को लपेटे हुए है. यहां बड़े- बड़े त्यौहारों में या कोई भी शुभ घड़ी,यहां के लोग अलग-अलग तरह के खास परंपराएं पुराने समय से निभाते हुए आऐ हैं.   

अनोखा रिवाज

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अनोखा रिवाज

शादियों के शुभ अवसर पर करौली में एक ऐसा रिवाज किया जाता, जिसके बिना शादी अधूरी कही जाती है. यहां घरों में शादी से पहले, शादी वाले घरों के मुख्य द्वार पर अनोखी चित्रकारी होती है. 

घरों में इसका आंकलन

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घरों में इसका आंकलन

शादी वाले घरों के मुख्य द्वार पर  हाथी, घोड़े साथ ही चार सिपाही कुछ खास तरह से बनाए जाते हैं. जिससे माना जाता है की  घरों में इसका आंकलन इसी  चित्रकारी से होती है. 

पुराने जमाने की बारातों की झलक

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पुराने जमाने की बारातों की झलक

यहां के एक बुजुर्ग सेवानिवृत अध्यापक कृष्ण चंद्र चतुर्वेदी कहते हैं की यह परंपरा राजशाही जमाने से चली आ रही है .  इस परंपरा में  पुराने जमाने की बारातों की झलक भी देखने को मिलती है. चाहे लड़के की शादी हो या लड़की की, यह चित्रकार हर घर में करवाई जाती है. 

 

परंपरा नहीं मान्यता

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परंपरा नहीं मान्यता

यह कोई परंपरा नहीं बल्कि मान्यता है. जिसको हर घर में शादियों के समय निभाया जाता है. इसको कोई आम नहीं बल्की  कुछ चुनिंदा चित्रकार जानते और बनाते हैं.

ऐतिहासिक परंपरा

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 ऐतिहासिक परंपरा

यह परंपरा यहां की ऐतिहासिक परंपरा में से एक है. इसे हाथी घोड़ा के नाम से भी जाना जाता है. यहां के लोग इस ऐतिहासिक परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी निभाते आ रहें हैं.  

मुख्य द्वार पर विशेष

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मुख्य द्वार पर विशेष

इस परंपरा में घर के मुख्य द्वार पर विशेष रूप से डोलियां, शहनाई, ढोलक,घोड़े, चार सिपाही, रेलगाड़ी आदि  चीज़े बनाई जाती है.

परंपरा के बिना शादियां अधूरी

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परंपरा के बिना शादियां अधूरी

करौली के लोगों का मानना है की इस परंपरा के बिना यहां की शादियां अधूरी हैं.