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ट्विन टावर में धमाकों से कैसे बिखरे आस-पास के घरों के खिड़कियां-शीशे, तस्वीरें हैं गवाह

Jaipur: नोएडा के सेक्टर 93 में सुपरटेक ट्विन टावर ध्वस्त हो गया है. इसे गिराने में 3700 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई दिनों की मेहनत के बाद ये पूरा सिस्टम तैयार हुआ था. ट्विन टावर के गिरते ही धूल का गुबार पूरे इलाके में फैल गया है. धमाके बाद कुछ ही सेंकड में 32 मंजिला इमारत मिट्टी में तब्दील हो गई.

लोगों के घरों में छूटे निशान

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लोगों के घरों में छूटे निशान

वहीं, टावर के ध्वस्त होने के बाद जब वहां आस-पास रहने वाले लोग अपने घरों में लौट रहे हैं, तो खुद का घर ही पहचान नहीं पा रहे हैं. घर में कई तरह के नुकसान हुए हैं, जो अब पता चला रहे हैं.

बालकनी और फ्लैट्स में दरारें आई

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बालकनी और फ्लैट्स में दरारें आई

वापस आए लोगों में से किसी के घर की खिड़कियां टूटी हैं तो किसी के घर की बालकनी में दरार आ गई है. पास की सोसाइटी एटीएस के फ्लैट्स की बालकनी और फ्लैट्स में दरारें आई हैं.

तेज आवाज से टूटे कांच

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तेज आवाज से टूटे कांच

लोगों को लग रहा था कि टावर के धमाके में ध्वस्त होने से  बाउंड्री वॉल और प्लास्टर झड़ने जैसी प्रॉब्लम्स आएंगी लेकिन तेज धमाके के लिए सबसे ज्यादा असर घर की खिड़कियों पर पड़ा है.

धमाके से पहले 65 डेसीबल थी आवाज

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धमाके से पहले 65 डेसीबल थी आवाज

बता दें कि ट्विन टॉवर को गिराने के समय 101 डेसीबल की आवाज हुई. यह आवाज धमाके से पहले 65 डेसीबल थी.

स्वास्थ्य के लिए खतरनाक 70 से 80 डेसीबल

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स्वास्थ्य के लिए खतरनाक 70 से 80 डेसीबल

जानकारी के अनुसार, 2 से 3 मिनट तक 70 से 80 डेसीबल तक पहुंचने पर आवाज सेहत के लिए हानिकारक होती है. 110 डेसीबल में आदमी चिड़चिड़ा होने लगता है.

बंद थे लोगों के घर

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बंद थे लोगों के घर

अथॉरिटी की तरफ से जारी नोटिस के मुताबिक, ज्यादातर आस-पास के रहवासी लोग घर बंद करके चले गए थे. इससे उनकी सेहत पर तो नहीं, ट्विन टावर में हुए धमाकों का उनके घरों पर बुरा असर पड़ा है.