बिहार: आजादी के 75 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे किशनगंज के इस गांव के लोग
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बिहार: आजादी के 75 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे किशनगंज के इस गांव के लोग

करीब 1500 की आबादी वाले खाड़ी टोला गांव के लोग आज भी गुलामी की जिंदगी जी रहें है. इस गांव में बस नाम मात्र की सरकारी सुविधा है. बरसात के मौसम में पूरा खाड़ी टोला गांव टापू में तब्दील हो जाता है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

किशनगंज: बिहार के किशनगंज जिले के खाड़ी टोला गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण आज भी बदतर जिंदगी जी रहे हैं. गांव के लोग अपनी जान हथेली पर रखकर चचरी पुल से नदी पार करने को मजबूर हैं. गांव में बांध नहीं होने से गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है. 

आजादी के 75 साल बाद भी नहीं हो सका सड़क और पुल का निर्माण
खाड़ी टोला गांव के लोग आज भी नदी में बांध, सड़क और पुल के लिए तरस रहे हैं. यहां के कनकई नदी पर पुलिया नहीं होने से ग्रामीण आज भी जान हथेली पर रखकर नदी पार करते हैं. लोग अपनी जरूरत के काम के लिए किसी तरह चचरी पुल पार कर गांव से बाहर निकल पाते हैं. इससे बच्चों की पढ़ाई भी काफी प्रभावित होती है और किसानों को भी बीज और खाद के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

बरसात के मौसम में टापू में तब्दील हो जाता है गांव
करीब 1500 की आबादी वाले खाड़ी टोला गांव के लोग आज भी गुलामी की जिंदगी जी रहें है. इस गांव में बस नाम मात्र की सरकारी सुविधा है. बरसात के मौसम में पूरा खाड़ी टोला गांव टापू में तब्दील हो जाता है. यहां के लोगों के लिए महीनों तक गांव के बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. जिसकी वजह से यहां के लोग बरसात आने से पहले ही खाने-पीने का सामान जमा कर लेते हैं. जिससे कि बरसात आने के बाद यहां के लोगों को गांव के बाहर न जाना पड़े. 

बरसात के मौसम में जलकैदी बन जाते हैं ग्रामीण
एक ओर गांव का मुख्य सड़क से कोई संपर्क नहीं है तो वहीं पूरे नदी में बांध नहीं बनने के कारण नदी के कटाव से गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है. वहीं पुल नहीं बनने से ग्रामीणों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी खाड़ी टोला गांव की गर्भवती महिलाओं को होती है. प्रसव के लिए अस्पताल ले जाने के दौरान बहुत मुश्किल से नदी पार करना पड़ता है. गांव के किसान मुहम्मद आलम बताते हैं कि नदी में बांध नहीं होने के कारण दर्जनों किसानों की खेती योग्य जमीन नदी में विलीन हो चुकी है.

सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश 
ग्रामीण अपनी समस्या को लेकर इलाके के जनप्रतिनिधि समेत जिला के अधिकारियों से भी गुहार लगा रहे हैं. लेकिन उनकी समस्या का निराकरण करने वाला कोई नहीं है. जिससे तंग आकर यहां के लोग प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं.  

जनसमस्या को सदन पटल पर रखने पर उन्हें मार्शल आउट कर दिया जाता है- विधायक
हर बार जनप्रतिनिधियों के द्वारा नदी के उपर पुल निर्माण, प्रखंड मुख्यालय तक जाने के लिए सड़क और नदी में बांध का निर्माण कराने का आश्वासन दिया जाता है. लेकिन आज तक ग्रामीणों का सपना पूरा नहीं हो सका. जब इस मामले को लेकर स्थानीय विधायक से संपर्क किया गया तो उन्होंने सारा ठिकरा सरकार के माथे पर फोड़ दिया. ये इलाका बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है और यहां के विधायक अंजार नईमी का कहना है कि नदी कटाव और जनसमस्या को सदन के पटल में रखने पर उन्हें मार्शल आउट कर दिया जाता है. 

वहीं जब मामले को लेकर जल संसाधन के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार यादव से संपर्क किया गया तो उन्होने कहा कि 29 योजनाओं को स्वीकृति के लिए विभाग में भेजा गया था जिसमें से मात्र 7 योजनाओं को विभाग से स्वीकृति मिली है. उन्होंने कहा कि इस योजना में खाड़ी टोला गांव में बांध निर्माण के लिए प्रस्ताव नहीं है. हालांकी कार्यपालक अभियंता ने बरसात के मौसम में समस्या बढ़ने पर फ्लड फाइटिंग के तहत बांध का निर्माण करवाने की बात की है.

(इनपुट-अमित सिंह)

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