JOA-IT पोस्टकार्ड 817 के अभ्यार्थी बीते 4 साल से कर रहे नौकरी मिलने का इंतजार, मानसिक तनाव में 6000 परिवार!
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JOA-IT पोस्टकार्ड 817 के अभ्यार्थी बीते 4 साल से कर रहे नौकरी मिलने का इंतजार, मानसिक तनाव में 6000 परिवार!

JOA-IT Job: हिमाचल प्रदेश में JOA-IT पोस्टकार्ड 817 के अभ्यार्थी बीते चार साल से नौकरी पाने का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में वह सभी अपनी मांगों को लेकर राज्य सचिवालय पहुंचे, जहां उनका दर्द झलका. उन्होंने बताया कि वह बीते चार साल से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन आज उन्हें नौकरी नहीं मिली हैं.  

सांकेतिक तस्वीर

समीक्षा कुमारी/शिमला: गुरुवार को बड़ी संख्या में JOA-IT पोस्टकार्ड 817 के अभ्यार्थी अपना दर्द लेकर हिमाचल प्रदेश राज्य सचिवालय के बाहर पहुंचे, जिसकी वजह है 4 वर्षों से लगातार नौकरी पाने का इंतजार. वह इंतजार जो परीक्षाएं पूरी करने के बाद खत्म हो जाना चाहिए था, लेकिन ये बेरोजगार युवा अभी भी अपने हक की नौकरी पाने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कानूनी लड़ाई लड़ने के बावजूद भी अभी तक इन युवाओं को नौकरी नहीं मिल पाई है.

सिस्टम से हताश JOA-IT अभ्यार्थी सौरभ शर्मा ने बताया कि वह सिरमौर से हैं. वह नौकरी के लिए पिछले 4 वर्षों से केवल संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह अकेले नहीं हैं जो इस तरह संघर्ष कर रहे हैं, बल्कि करीब 6000 परिवार इसी मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं. सौरभ शर्मा ने बताया कि उनकी भर्ती का मामला पहले उच्च न्यायालय में गया फिर सर्वोच्च न्यायालय गया. इसके बाद 9 नवंबर 2030 को सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि इनकी भर्ती साल 2020 के रूल के मुताबिक की जाए.

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इसके बाद उच्च न्यायालय ने भी दो महीने में भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की बात कही, लेकिन अभी तक ऐसी कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कई मंचों से तुरंत प्रभाव से भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की बात कह चुके हैं, लेकिन इसके बाद उन्हें सुनने को मिलता है कि अभी तक कैबिनेट से अनुमति नहीं मिली. ऐसे में अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं कि आखिर कौन इन भर्ती प्रक्रियाओं को रोकना चाह रहा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कथन के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों हो रही है.

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सौरभ ने कहा कि उन्हें बार-बार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन भर्ती पूरी करवाने को लेकर कोई एक्शन नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के अलावा सरकार में कोई उनके पक्ष में नजर नहीं आता. मुख्यमंत्री खुद में हायर अथॉरिटी हैं. उन्हें इस पर खुद संज्ञान लेकर प्रक्रिया को पूरा करवाना चाहिए, लेकिन अभी तक तो उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं.

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