Rajni Bector ने महज 300 रुपये से की थी बिजनेस की शुरुआत, आज हैं सबसे बड़ी फूड कंपनी की फाउंडर

Rajni Bector ने महज 300 रुपये से की थी बिजनेस की शुरुआत, आज हैं सबसे बड़ी फूड कंपनी की फाउंडर

Success Story of Rajni Bector: लुधियाना की रहने वाली 82 वर्षीय पद्मश्री रजनी बेक्टर को बिजनेस वुमन ऑफ द ईयर और सोशल वर्कर के तौर पर साल 2021 में पद्मश्री से नवाज़ा जा चुका है. पद्मश्री रजनी बेक्टर क्रीमिका कंपनी की चेयरपर्सन और फाउंडर हैं. 

Rajni Bector ने महज 300 रुपये से की थी बिजनेस की शुरुआत, आज हैं सबसे बड़ी फूड कंपनी की फाउंडर

भरत शर्मा/लुधियाना: 1947 के बंटवारे से पंजाब के लाखों परिवारों को नुकसान हुआ, लेकिन इस दुख को चुनौती बनाकर कईओं ने आपदा को अवसर में बदला.  ऐसे लोग भी रहे जिन्होंने अपना सब कुछ गंवा कर फिर से खुद को बनाया और ऐसा बनाया कि आज मिसाल बन गए हैं. ऐसा ही किरदार हैं रजनी बेक्टर. तीन सौ रुपये से कारोबार शुरू किया. आज दो हज़ार करोड़ से अधिक का कारोबार कर रही हैं. ज़ाहिर है कि पद्मश्री रजनी बैक्टर के संघर्ष की कहानी काफी दिलचस्प है.  

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बहुत साधाराण परिवार में जन्मी रजनी ने बंटवारे के उस काले दौर को अपनी आंखों से देखा. उनके परिवार को भी घर-बार छोड़कर वापस आना पड़ा, लेकिन कड़ी मेहनत के चलते आज वह 2,000 करोड़ के टर्नओवर वाली एक कंपनी की मालकिन हैं.

लुधियाना की रहने वाली 82 वर्षीय पद्मश्री रजनी बेक्टर को बिजनेस वुमन ऑफ द ईयर और सोशल वर्कर के तौर पर साल 2021 में पद्मश्री से नवाज़ा जा चुका है. पद्मश्री रजनी बेक्टर क्रीमिका कंपनी की चेयरपर्सन और फाउंडर हैं. उन्होंने महज़ तीन सौ रुपये से बिजनेस की शुरुआत की थी, लेकिन आज दुनिया की सबसे बड़ी फूड कंपनियां क्रीमिका कंपनी की क्लाइंट हैं.  17 साल की उम्र में शादी करने के बाद उन्होंने पहले अपने परिवार की देखभाल की और फिर एक बिजनेसवुमन का फर्ज निभाया. 

रजनी बैक्टर का कहना है कि बंटवारे के वक्त उनकी उम्र बहुत छोटी थी, लेकिन आज भी वो मंजर उनकी आंखों के सामने है. हर जगह लाशों के ढेर उन्हें भूलते नहीं हैं. उनके भाई और भाभी पाकिस्तान से बुर्का पहनकर भारत आए थे. 

रजनी बेक्टर की शादी लुधियाना के आरती परिवार में हुई थी. उन्हें खाना पकाने का बहुत शौक था और उन्होंने इस शौक को अपना पेशा बना लिया. उनकी सफलता में उनके पति और ससुराल वालों का विशेष सहयोग रहा.  उन्होंने कहा कि कारोबार की शुरुआत में वह मेलों में जाकर आइसक्रीम बेचते थे और कुछ रिश्तेदार और शहर के कई लोग उनके काम के लिए उनका मज़ाक उड़ाते थे, लेकिन परिवार ने उनका भरपूर साथ दिया. उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर आप सच्चे दिल से कोई काम करेंगे तो एक दिन ज़रूर सफल होंगे. जाहिर है, रजनी बेक्टर की कहानी कई लोगों का हौंसला बढ़ाने वाली है और आज के दौर में नौजवानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन रही हैं. 

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