National Lok Adalat: 9 दिसंबर को हो जाएगा समस्याओं का समाधान! जानें लोक अदालतों में क्या होगा
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National Lok Adalat: 9 दिसंबर को हो जाएगा समस्याओं का समाधान! जानें लोक अदालतों में क्या होगा

MP National Lok Adalat: पूरे प्रदेश के लंबित मामलों के लिए लोक अदालत के आयोजन के लिए सूचना आई है. इनमें जिला और राज्य उपभोक्ता की लोक अदालत के आयोजन के लिए सूचना आई है जिससे कई लोगों के लिए राहत की बात है. 

 

National Lok Adalat: 9 दिसंबर को हो जाएगा समस्याओं का समाधान! जानें लोक अदालतों में क्या होगा

MP National Lok Adalat: लंबे समय से छोटे मामलों के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है. मध्यप्रदेश के सभी जिलों में 9 दिसंबर को नेशनल लोक अदालत आयोजित की जाएगा. इसकी आधिकारिक जानकारी जारी कर दी गई है. लोक अदालत में चिन्हित कुछ मामलों के साथ ही कोर्ट में होने के साथ ही राजीनामा योग्य मामलों को रखा जाएगा. इसके अलावा राशि वसूली, श्रम और रोजगार संबंधी विवाद, बिजली, पानी के बिलों सहित अन्य बिल भुगतान, मेंटेनेंस सहित अन्य मामलों को रखा जाएगा.

भोपाल में जिला और राज्य उपभोक्ता की शिकायतों के हल के लिए शनिवार को नेशनल लोक अदालत (Lok Adalat)का आयोजन किया जाएगा. कई लोग जो लंबे समय से कोर्ट का चक्कर लगा रहे थे उनके लिए काम की खबर है. इससे जो पुराने लंबित मामले है वो जल्दी निपट जाएगें.  लोक अदालतों में उस तरह के मामले जाते हैं जिससे सामान्य कोर्ट का काम आसान हो और काम का बोझ कम हो. 

सूचना
राज्य के सभी जिलों में 9 दिसंबर को नेशनल लोक अदालत लगाए जाएंगे. सभी पुराने लंबित मामलो का निराकरण किया जाएगा. इन अदालतो को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय में लगाया जाएगा. नेशनल लोक अदालत में बैंक रिकवरी प्रकरण, विद्युत, टेलीफोन, जलकर, संपत्ति कर के प्रकरण, न्यायालय में लंबित राजीनामा योग्य प्रकरण, अपराधिक शवनीय प्रकरण , क्लेम प्रकरण, जलकर, संपत्ति कर के प्रकरण, हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत राजीनामा योग्य प्रकरण, भूमि अधिग्रहण और अन्य सिविल प्रकरण का निराकरण किया जाएगा.  

लोक अदालत 
लोक अदालत का अर्थ पीपुल्स कोर्ट जो गांधीवादी सिंद्धांत पर आधारित है. यह वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रणाली के घटको में से एक है जिससे लोगों को सस्ता, अनौपचारिक और जल्द न्याय दिलाने के लिए तंत्र प्रदान करता है. पहला लोक अदालत 1982 में गुजरात में आयोजित हुआ था. बाद में इसकी लोकप्रियता को देखते हुए इसे कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत वैधानिक दर्जा दिया गया था. इस अधिनियम में लोक अदालत के संगठन और कामकाज से संबंधित नियम है.  

 

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