उज्जैन बना PFI का गढ़! जानिए कब-कब विवादों में आया इस संगठन का नाम?
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उज्जैन बना PFI का गढ़! जानिए कब-कब विवादों में आया इस संगठन का नाम?

मध्य प्रदेश में PFI उज्जैन में खासा सक्रिय है. यही वजह है कि बीते कुछ सालों में पीएफआई ने यहां अपनी पैठ बना ली है और कई बार यह संगठन विवादों में भी रहा है. तो आइए जानते हैं कि उज्जैन में पीएफआई कब-कब विवादों में रहा है.  

उज्जैन बना PFI का गढ़! जानिए कब-कब विवादों में आया इस संगठन का नाम?

राहुल सिंह राठौर/उज्जैनः राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी NIA ने गुरुवार को देश के विभिन्न राज्यों में पीएफआई (PFI) के ठिकानों पर छापे मारे. मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) में भी पीएफआई के ठिकानों पर छापेमारी हुई. एनआईए ने पीएफआई के प्रदेश महासचिव जमील शेख को उज्जैन से सुबह 4-5 बजे के बीच उठाया. NIA ने सबसे पहले शहर के थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत एटलस चौराहे के नजदीक स्थित पीलू की मस्जिद के पास के उसके पुराने घर व दुकान में छापा मारा. इसके बाद एनआईए ने जमील के आजाद नगर स्थित निवास पर दबिश दी और उसे धर दबोचा.

उज्जैन में कब-कब विवादों में आया PFI
उज्जैन में सबसे पहले 17 फरवरी 2021 को यह संगठन सुर्खियों में उस वक्त आया जब पीएफआई के 15वें स्थापना दिवस पर उज्जैन में जगह जगह पीएफआई के झंडे फहराए गए. जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. पुलिस हरकत में आई और पूरे शहर से झंडों को उतरवाया गया. हालांकि उसी दिन शाम में पुलिस ने पीएफआई को जनसभा करने की परमिशन दे दी! कार्यक्रम के दौरान बीजेपी और संघ से देश को बचाने पर ही जोर दिया गया. इस पर संत और हिंदू संगठनों ने विरोध दर्ज कराया और अगले दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.  

धार्मिक नगरी उज्जैन में पीएफआई के कार्यक्रम को लेकर हिंदू संगठनों और संत समाज में नाराजगी देखी गई. जिसके बाद पुलिस ने पीएफआई के 6 सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया. कार्यक्रम तय शर्तों के अनुरूप नहीं होने पर महाकाल थाने में भी आयोजक के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई. आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान यूपी में उस वक्त पकड़े गए आतंकियों का भी समर्थन किया गया.

इस पूरे हंगामे के बीच 20 फरवरी 2021 को अखंड हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य शेखर महाराज ने आरोप लगाया कि एक तेज स्पीड ट्रक उनके आश्रम के गेट पर आया और वहां से कट मारकर चला गया. घटना के वक्त आचार्य शेखर महाराज अपने साथियों के साथ गेट पर ही खड़े थे. इसके आरोप भी पीएफआई पर लगे. इसके बाद 23 जुलाई 2021 को फिर से उज्जैन में पीएफआई सुर्खियों में आया जब शहर भर में कुर्बानी के नाम पर 2400 रुपए पीएफआई को देने की अपील वाले पोस्टर लगाए गए थे. खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में ये पोस्टर लगाए गए थे. अखंड हिंदू सेना ने इसका विरोध किया और तत्कालीन एसपी अमरेंद्र सिंह से मामले की जांच की मांग की थी. 

1 नवंबर 2021 को नॉर्थ त्रिपुरा में सांप्रदायिक घटना घटी. जिस पर पीएफआई के सदस्यों ने उज्जैन में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और घटना के पक्ष में अपनी बात रखी लेकिन उस बयान में कई आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया गया. जिस पर पुलिस ने पीएफआई पर मामला दर्ज किया था. दरअसल विवादित संगठन पीएफआई को देश के कई राज्यों में बैन किया हुआ है. केंद्र सरकार भी इस संगठन पर बैन लगाने की तैयारी कर रही है. एमपी में उज्जैन को इस संगठन का गढ़ माना जाता है. 

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