नगर निकाय चुनावः इस मांग को लेकर हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका, जानिए क्या है मामला
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नगर निकाय चुनावः इस मांग को लेकर हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका, जानिए क्या है मामला

याचिका में कहा गया है कि बिना पार्षद बने अध्यक्ष बनने से नगर पालिका, नगर पंचायत अध्यक्ष की जनता के प्रति जवाबदेही नहीं होगी क्योंकि वह जनता द्वारा नहीं चुना जाएगा. याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है. 

नगर निकाय चुनावः इस मांग को लेकर हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका, जानिए क्या है मामला

शैलेंद्र सिंह भदौरिया/ग्वालियरः नगर निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. हालांकि तारीखों के ऐलान के साथ ही निकाय चुनाव का मामला कोर्ट पहुंच गया है. दरअसल डबरा नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष सत्यप्रकाशी परसेड़ीया ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में जनहित याचिका दाखिल की है. इस याचिका में नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी प्रत्यक्ष तौर पर कराने की मांग की गई है. बता दें कि अभी सिर्फ मेयर का चुनाव ही प्रत्यक्ष तरीके से हो रहा है. 

क्या है याचिका में
याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि मेयर की तरह नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी प्रत्यक्ष होना चाहिए. अभी नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होना है.बता दें कि प्रत्यक्ष तरीके में सीधे जनता नगर पालिका अध्यक्ष के लिए वोट करेगी. वहीं अप्रत्यक्ष चुनाव में अध्यक्ष का चुनाव पार्षद करते हैं. याचिका में नगर पालिका अधिनियम 1993 की धारा 34 में संशोधन कराने की भी मांग की गई है. इस अधिनियम के तहत नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए कोई भी मतदाता, जिसकी आयु 25 वर्ष से अधिक हो, वह चुनाव लड़ सकता है. खास बात ये है कि अधिनियम की धारा 34 के तहत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का पार्षद होना भी जरूरी नहीं है.याचिका में आरोप लगाया गया है कि इससे खरीद-फरोख्त को बढ़ावा मिल सकता है.   
 
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आम मतदाता के अधिकारों का हनन है. याचिका में मांग की गई है कि या तो महापौर का चुनाव भी अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराया जाए या फिर सभी चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से हों. याचिकाकर्ता ने सरकार भी निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि सरकार प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने से डर रही है. 

याचिका में कहा गया है कि बिना पार्षद बने अध्यक्ष बनने से नगर पालिका, नगर पंचायत अध्यक्ष की जनता के प्रति जवाबदेही नहीं होगी क्योंकि वह जनता द्वारा नहीं चुना जाएगा. याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है. वहीं याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. 

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