Ghaziabad News: इलाहाबाद HC ने GDA के उपाध्यक्ष और बिल्डर को किया तलब, 400 की जगह किया 670 फ्लैट का निर्माण
Advertisement
trendingNow0/india/delhi-ncr-haryana/delhiharyana1995530

Ghaziabad News: इलाहाबाद HC ने GDA के उपाध्यक्ष और बिल्डर को किया तलब, 400 की जगह किया 670 फ्लैट का निर्माण

Ghaziabad News: गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और इंदिरापुरम स्थित एक्सप्रेस गार्डन सोसायटी बनाने वाले बिल्डर पंकज गोयल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 दिसंबर को किया तलब किया है.

 

Ghaziabad News: इलाहाबाद HC ने GDA के उपाध्यक्ष और बिल्डर को किया तलब, 400 की जगह किया 670 फ्लैट का निर्माण

Ghaziabad News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और इंदिरापुरम स्थित एक्सप्रेस गार्डन सोसायटी बनाने वाले बिल्डर पंकज गोयल को 8 दिसंबर को किया तलब किया है. इस समिति की RWA वर्ष 2014 से एक मामले को लेकर संघर्ष कर रही है.

आरोप है कि अधिकारियों की मिली भगत से बिल्डर द्वारा स्वीकृत नक्शे में 536 फ्लैट की जगह 670 फ्लैट का निर्माण किया गया, जिससे 134 अवैध रूप से फ्लैट का निर्माण किया गया है. हाईकोर्ट ने 4 दिसंबर को आदेश जारी कर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह के साथ बिल्डर पंकज गोयल को 8 तारीख को कोर्ट में तलब किया है.

ये भी पढ़ें: Delhi News: आप विधायक ने भाजपा पर साधा निशाना कहा, उनका काम बस नकारात्मक सोच रखते हुए अच्छे कामों को रोकना

 

RWA पदाधिकारी अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया की 2014 से वह लोग बिल्डर और अधिकारियों के खिलाफ लड़ रहे हैं. अनिल कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक बिल्डर को 536 फ्लैट बनाने की अनुमति थी, लेकिन उसने पार्किंग में भी फ्लैट बना दिए. वर्ष 2014 से लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई तब उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया.

इस मामले में गाजियाबाद के जिलाधिकारी और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का काम देख रहे राकेश कुमार सिंह ने व्हाट्सएप ग्रुप पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि 8 तारीख को प्राधिकरण की तरफ से जवाब दाखिल किया जाएगा. 

दरअसल बिल्डर की तरफ से पहले मात्र 400 फ्लैट की का मानचित्र स्वीकृत कराया गया था, जिसे बढ़ाकर स्टेट पार्किंग की जगह 136 फ्लैट का निर्माण करते हुए 536 फ्लैट का निर्माण कर दिया, जिसे बाद में बढ़ते हुए 670 फ्लैट का निर्माण कर दिया गया, जिनके लिए कोई नक्शा पास नहीं कराया गया न ही किसी तरह की मंजूरी की गई. जो सोसायटी 400 लोगों के लिए बनी थी. वहां 670 फैमिली रहने लगी हैं, जिससे बिजली पानी और पार्किंग की बेहद समस्या हुई.

इसके बाद लोगों ने हाईकोर्ट का रुख किया. अब हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद देखना होगा की किस तरीके से बिल्डर और प्राधिकरण के अधिकारियों की मिली भगत पर हाई कोर्ट सख्त रुख अपनाते हैं.

Input: Piyush Gaur

Trending news