Death Anniversary: अस्पताल में शूटिंग करने से घबराते थे देव आनंद, होती थी इस चीज से तकलीफ

Dev Anand Death Anniversary: धर्मदेव पिशोरीमल आनंद यानी देव आनंद भारत के वो दमदार कलाकार थे जिनके लिए लोगों की दीवानगी सिर चढ़कर बोलती थी. देव आनंद अपनी फिल्मों से ज्यादा अपनी अजीबो-गरीब आदतों की वजह से जाने जाते थे.

Written by - Kamna Lakaria | Last Updated : Dec 3, 2022, 07:14 AM IST
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Death Anniversary: अस्पताल में शूटिंग करने से घबराते थे देव आनंद, होती थी इस चीज से तकलीफ

नई दिल्ली: देव आनंद को डायरी लिखने की आदत थी. वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी , एचीवमेंट और हर अपडेट उसी डायरी में लिखा करते. आज उसी डायरी के पन्नों को खोल के देखते हैं कि कैसे गुरदासपुर में पैदा हुआ एक आम सा लड़का जिसकी एक मुस्कुराहट ने कई दिल घायल किए. देवानंद जिन्होंने बड़े पर्दे पर कई दशकों तक राज किया. देव आनंद अपने अतरंगी शौक और आदतों की वजह से भी जाने जाते थे.

अस्पताल में नहीं करते थे शूट

देव आनंद को लेकर एक किस्सा बड़ा मशहूर है. कहा जाता है कि एक बार वो अपने फैन को थैंक्यू कहना भूल गए थे तो उन्होंने अपने उस प्रशंसक का सिर्फ शुक्रिया अदा करने के लिए 40 किलोमीटर पीछे गाड़ी घुमा दी थी. इसके अलावा उन्हें लेकर हर कोई जानता था कि वो अस्पताल में जाना पसंद नहीं करते थे. यहां तक की फिल्मों में भी अस्पताल के सीन शूट करने के लिए वो अस्पताल नहीं जाते थे. क्योंकि उन्हें बीमार लोगों को देखकर बहुत तकलीफ हुआ करती थी. ऐसे में सेट बनाकर फिल्म की शूटिंग की जाती थी.

लड़कियां हाथ में लेती थीं ऑटोग्राफ

देव आनंद के लिए लड़कियों की दीवानगी सिर चढ़कर बोलती थी. ऐसे में एक दिन एक लड़की उनके पास ऑटोग्राफ लेने आई. वो कहती कि मेरी नानाी आपकी बहुत बड़ी फैन है और कहती हैं कि आपसे मिले बिना वो नहीं मरेंगी. ऐसे में देव साहब ने कहा तब तो मैं उनसे कभी नहीं मिलूंगा क्योंकि मैं चाहता हूं कि वो जिंदा रहें.

कैसे मिला पहला ब्रेक

1945 में बाबूराव पाई के बारे में देवानंद को पता लगा जो अपनी एक नई फिल्म एक नए चेहरे की तलाश में थे. देवानंद स्टूडियो के बाहर जाकर चौकीदार के पास खड़े हो गए. ऐसे में चौकीदार से पूछा कि साहब कहां हैं उनसे मिलना है. तभी वहां से बाबूराव पाई की गाड़ी गुजरी और देवानंद के थोड़ा आगे जाकर रुक गई. बाबूराव पाई ने पीछे मुड़कर देखा देवानंद से नजरें मिलीं और देवानंद मुस्कुरा दिए.

इसके बाद बाबूराव ने अपने चौकीदार को बुलाया और पूछा वो कौन था तो चौकीदार ने बताया कि आपसे मिलने आया था. ऐसे में देवानंद जब बाबूराव से मिले तो बाबूराव उन्हें देखकर मुस्कुराते ही रहे. देवानंद ने उनकी नई फिल्म में काम करने की इच्छा जताई फिर क्या हम एक हैं से देवानंद ने इंडस्ट्री में डेब्यू किया. ऐसे में देवानंद कहते हैं कि इस घटना से मैंने यही सीखा कि कभी अपना आत्मविश्वास न खोएं.

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