हरीश रावत की सियासी साख की आखिरी लड़ाई, कहीं 'राजनीतिक मौत का कुआं' न बन जाए ये चुनाव

Uttarakhand Election Result: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के परिणाम गुरुवार यानी 10 मार्च को आएंगे. इस चुनाव में जिन राजनेताओं का भविष्य दांव पर लगा है उनमें सबसे प्रमुख हैं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत. 73 साल के हरीश रावत (हरदा) के लिए इस चुनाव का परिणाम करो या मरो वाला होगा. 

Written by - Lalit Mohan Belwal | Last Updated : Mar 10, 2022, 12:59 PM IST
  • कांग्रेस में सीएम पद के प्रमुख दावेदार
  • हरदा हारे तो राजनीति का होगा अंत?

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हरीश रावत की सियासी साख की आखिरी लड़ाई, कहीं 'राजनीतिक मौत का कुआं' न बन जाए ये चुनाव

नई दिल्लीः Uttarakhand Election Result: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के परिणाम गुरुवार यानी 10 मार्च को आएंगे. जनता और राजनीतिक दलों को नतीजों का बेसब्री से इंतजार है. चुनाव परिणाम न सिर्फ राज्य की दिशा तय करेंगे, बल्कि राजनेताओं का भविष्य भी तय करेंगे. जिन राजनेताओं का भविष्य दांव पर लगा है उनमें सबसे प्रमुख हैं पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रचार अभियान के प्रमुख हरीश रावत. 73 साल के हरीश रावत (हरदा) के लिए इस चुनाव का परिणाम करो या मरो वाला होगा. 

कांग्रेस में सीएम पद के प्रमुख दावेदार
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि अगर हरीश रावत जीतते हैं और कांग्रेस बहुमत हासिल करती है तो वह राज्य में मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार होंगे. यही नहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में दो-दो सीट से हारने की टीस जो उनके मन में है वह भी जीत के बाद खत्म हो जाएगी. 

2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान हरीश रावत मुख्यमंत्री रहते हुए हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा सीट से हार गए थे और उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने राज्य में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया था. 

हारे तो राजनीति का होगा अंत?
इस बार फिर हरीश रावत के हाथ में कांग्रेस को राज्य की सत्ता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी. वह इसमें कितने कामयाब हुए यह कल साफ हो जाएगा, लेकिन राजनीतिक जानकार कहते हैं कि अगर हरीश रावत यह चुनाव हार जाते हैं तो यह उनके राजनीतिक भविष्य का अंत होगा, क्योंकि उनकी जगह लेने के लिए कांग्रेस के अंदर कई नेता हैं.

रामनगर से चुनाव लड़ना चाहते थे हरदा
हरीश रावत ने इस बार लालकुआं विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा. वह रामनगर से चुनाव लड़ना चाहते थे. वहां से उनका नाम बतौर प्रत्याशी घोषित भी हो गया था, लेकिन हरीश रावत के एक दौर के विश्वासपात्र और अब पार्टी में ही उनके धुर विरोधी रंजीत रावत रामनगर से अपने लिए टिकट मांग रहे थे. 

उनकी नाराजगी के चलते हरीश रावत को अपनी सीट बदलनी पड़ी और वह लालकुआं में चुनाव लड़ने आए. इसके चलते कांग्रेस ने यहां पहले से घोषित प्रत्याशी संध्या डालाकोटी का टिकट काट दिया. 

लालकुआं हरदा के लिए राजनीतिक मौत का कुआं या अमृत कुंड?
इसके बाद संध्या डालाकोटी ने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया, जबकि बीजेपी के मोहन सिंह बिष्ट ने भी हरीश रावत को लालकुआं में कड़ी टक्कर दी है. यह देखना दिलचस्प होगा कि हरीश रावत लालकुआं का रण जीतते हैं या उन्हें हार का सामना करना पड़ता है. क्योंकि, बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि लालकुआं हरीश रावत की राजनीतिक मौत का कुआं होगा. 

इसके जवाब में हरीश रावत ने कहा था कि लालकुआं अमृत कुंड है. इसी अमृत कुंड से हरीश रावत जिस अमृत को लेकर आएगा, वही अमृत लालकुआं के भी विकास को शीर्ष पर पहुंचाएगा और उत्तराखंड के विकास को भी गति देने का काम करेगा.

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