Babri Demolition Case: सभी 32 आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी, 'मजबूत साक्ष्य नहीं'

CBI की विशेष अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने ये साफ कर दिया है कि इस मामले में कोई मजबूत साक्ष्य नहीं है..

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Sep 30, 2020, 12:56 PM IST
  • बाबरी ढांचा विध्वंस पर कोर्ट का बड़ा फैसला
  • सभी 32 आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी
  • सबूत जुटाने में नाकाम रही CBI- विशेष अदालत
Babri Demolition Case: सभी 32 आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी, 'मजबूत साक्ष्य नहीं'

लखनऊ: अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर बड़ा फैसला आ गया है. सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को इस मामले में बरी कर दिया है.

सभी 32 आरोपियों को किया बरी

बता दें, फैसला सुनाते वक्त 32 आरोपियों में से सिर्फ 6 आरोपी कोर्ट में मौजूद नहीं थे, जबकि 26 आरोपी मौजूद थे. बाकी आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे. जज एस के यादव ने कहा कि मजबूत साक्ष्य नहीं है, नेताओं ने भीड़ को रोकने की कोशिश की.

किन 32 आरोपियों को किया गया बरी?

1). लालकृष्ण आडवाणी
2). मुरली मनोहर जोशी
3). कल्याण सिंह
4). उमा भारती 
5). विनय कटियार
6). साध्वी ऋतंभरा
7). महंत नृत्य गोपाल दास
8). डॉ. राम विलास वेदांती
9). चंपत राय
10). महंत धर्मदास
11). सतीश प्रधान
12). पवन कुमार पांडेय
13). लल्लू सिंह
14). प्रकाश शर्मा
15). विजय बहादुर सिंह
16). संतोष दुबे
17). गांधी यादव
18). रामजी गुप्ता
19). ब्रज भूषण शरण सिंह
20). कमलेश त्रिपाठी
21). रामचंद्र खत्री
22). जय भगवान गोयल
23). ओम प्रकाश पांडेय
24). अमर नाथ गोयल
25). जयभान सिंह पवैया
26). महाराज स्वामी साक्षी
27). विनय कुमार राय
28). नवीन भाई शुक्ला
29). आरएन श्रीवास्तव
30). आचार्य धर्मेंद्र देव
31). सुधीर कुमार कक्कड़ 
32). धर्मेंद्र सिंह गुर्जर

49 में से 32 आरोपी ज़िंदा हैं

लखनऊ सीबीआई की विशेष कोर्ट आज अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को गिराने का मामले में फैसला आ चुका है, सभी 32 आरोपी दोषमुक्त हो गए हैं. लेकिन दिलचस्प बात तो ये है कि विवादित ढांचा तोड़ने के इस मामले में कुल 49 लोगों को आरोपी बनाया गया था और FIR दर्ज हुई थी, जिनमें से 32 लोग ही अभी ज़िंदा हैं. जिन्हें अदालत ने बरी कर दिया है.

केस में कई बड़े नाम शामिल

इस केस में आरोपियों की सूची में कई बड़े नाम शामिल थे. इसमें सबसे बड़ा नाम पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का था, इसके अलावा उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी इस केस में आरोपी थे. पूर्व केंद्रीय मुरली मनोहर जोशी, मंत्री उमा भारती, सांसद साक्षी महाराज और विनय कटियार जैसे 32 आरोपी थे.

पहली FIR में क्या था?

जानकारी के मुताबिक इस मामले में कारसेवकों के खिलाफ पहली FIR दर्ज की गई थी, जिसका नंबर 197/1992 था. बता दें, इस FIR में कारसेवकों पर ये आरोप लगाया गया था कि ये डकैती, लूटपाट, मारपीट करना, चोट पहुंचाना, सार्वजनिक इबादत गाह को क्षतिग्रस्त करने और धार्मिक वैमनस्यता भड़काने के मामले में संलिप्त हैं.

दूसरी FIR में क्या था?

वहीं यदि दूसरी FIR की बात करें, जिसकी संख्या 198/1992 है. उसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP), विश्व हिंदू परिषद (VHP), बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कुल 8 नेताओं और पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया था. इन सभी नेताओं पर भड़काऊ भाषण के जरिए लोगों को उकसाने का आरोप लगाया गया था.

हालांकि, कोर्ट ने ये स्वीकार कर लिया है कि CBI इस मामले में सबूत जुटाने में नाकाम रही. ऐसे में सभी आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया गया है. आपको बता देते हैं कि इस मामले में 49 आरोपियों में से किन 17 लोगों की मौत हो चुकी है.

17 लोगों के नाम, जिनका निधन हो चुका है

1). अशोक सिंघल
2). गिरिराज किशोर
3). विष्णु हरि डालमिया
4). मोरेश्वर सावें
5). महंत अवैद्यनाथ
6). महामंडलेश्वर जगदीश मुनि 
7). बैकुंठ लाल शर्मा
8). परमहंस रामचंद्र दास
9). डॉ. सतीश नागर
10). बालासाहेब ठाकरे
11). डीबी राय
12). रमेश प्रताप सिंह
13). हरगोविंद सिंह
14). लक्ष्मी नारायण दास
15). राम नारायण दास
16). विनोद कुमार बंसल
17). राजमाता सिंधिया

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