Jaipur News: नसबंदी की पहल में पुरुषों की भागीदारी ना के बराबर, 37.9% महिलाओं ने कराई नसबंदी
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Jaipur News: नसबंदी की पहल में पुरुषों की भागीदारी ना के बराबर, 37.9% महिलाओं ने कराई नसबंदी

Jaipur Health News: राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग की ओर से परिवार नियोजन अभियान शुरू किया गया. जहां नेशनल फैमिली हेल्‍थ सर्वे-5 की रिपोर्ट की माने तो भारत में परिवार नियोजन के तहत 37.9% महिलाओं ने नसबंदी कराई है, वहीं सिर्फ 0.3% पुरुषों ने नसबंदी कराने का फैसला लिया है. 

Jaipur News: नसबंदी की पहल में पुरुषों की भागीदारी ना के बराबर, 37.9% महिलाओं ने कराई नसबंदी

Jaipur News: राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग की ओर से परिवार नियोजन को लेकर आज से अभियान शुरू हो गया है.  परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी भी बढ़े, इसके लिए प्रदेशभर में पुरुष नसबंदी पखवाड़े की शुरूआत हुई, लेकिेन समाज में फैले मिथक और भ्रामक प्रचार और जिम्मेदारियों से बच रहे पुरुष लगातार राज्य सरकार के इस अभियान का फेल करते जा रहे हैं. 

बता दें कि राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे भारत में परिवार नियोजन की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की ही है.  सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद भी पुरुष नसबंदी करवाने से दूर भाग रहे है. नेशनल फैमिली हेल्‍थ सर्वे-5 की रिपोर्ट की माने तो भारत में परिवार नियोजन के तहत 37.9% महिलाओं ने नसबंदी कराई है, वहीं सिर्फ 0.3% पुरुषों ने नसबंदी कराने का फैसला लिया हैं, लेकिन ऐसे ही आंकड़ों के बीच राजस्थान में आज से 4 दिसम्बर तक फिर से पुरुषों को नसबंदी करवाने के लिए चिकित्सा विभाग की ओर से प्रेरित किया जाएगा. जिसको लेकर विभाग ने विशेष अभियान की शुरुआत की हैं.  

नसबंदी की पहल में पुरुषों की भागीदारी ना के बराबर 

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रम और योजनाओं के बाद भी महिलाओं की तुलना में पुरुष नसबंदी के आंकड़े काफी कमजोर है. आकड़ों के अनुसार नसबंदी कराने वाले पुरुष महज दो फीसदी ही है. आंकड़ों की माने तो परिवार नियोजन का जिम्मा 98 फीसदी महिलाओं पर है. राजस्थान में साल 2019 में कुल 2,57,310 पुरुष और महिलाओं ने नसबंदी करवाई थी. जिसमें से सिर्फ 3,106 पुरुष थे. साथ ही 2,60,416 महिलाओं ने नसबंदी करवाकर परिवार नियोजन का जिम्मा अपने पर लिया था. 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम डॉ. विजय सिंह फौजदार ने बताया कि परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी कम है. इसे ही बढ़ाने और  समाज में जागरूकता लाने के साथ ही चिकित्सा संस्थानों पर पुरुष लभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण नसबंदी सेवाएं प्रदान करने के लिए इस अभियान की शुरुआत की गई है.

समाज में फैले मिथकों के कारण पुरुष अभी भी नसबंदी करवाने से घबराते है. जबकि महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की नसबंदी आसान है. पुरुष नसबन्‍दी करने में केवल 5-10 मिनट का समय लगता है और कोई चीरा भी नहीं लगता है. साथ ही व्यक्ति 48 घंटे बाद फिर से सामान्य कामकाज करना शुरू कर देता है. जबकि महिलाओं के बड़े चीरा लगाना होता है और उन्हें फिर से सामान्य कामकाज करने में अधिक समय लगता है. 

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