Mulayam Singh Yadav: जब मुलायम सिंह यादव पर चलीं थी 9 गोलियां! PM बनते-बनते रह गए थे
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Mulayam Singh Yadav: जब मुलायम सिंह यादव पर चलीं थी 9 गोलियां! PM बनते-बनते रह गए थे

सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का सोमवार को निधन हो गया है. वह लंबे समय से बीमार थे. मुलायम सिंह यादव के निधन के साथ ही भारतीय राजनीति का एक अध्याय समाप्त हो गया है. एक अध्यापक के तौर पर करियर शुरू करने वाले मुलायम सिंह यादव अपनी मेहनत और समझ से देश की राजनीति के बड़े नेता बनकर उभरे. उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े कई किस्से हैं, उन्हीं में से दो किस्से आज हम आपको यहां बता रहे हैं कि किस तरह से उन पर जानलेवा हमला हुआ और कैसे वह पीएम बनते बनते रह गए थे. 

Mulayam Singh Yadav: जब मुलायम सिंह यादव पर चलीं थी 9 गोलियां! PM बनते-बनते रह गए थे

Mulayam Singh Yadav Death: समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का सोमवार को मेदांता अस्पताल में निधन हो गया. मुलायम सिंह 82 साल के थे और लंबे समय से बीमार थे. मंगलवार को सैफई में मुलायम सिंह यादव का अंतिम संस्कार किया जाएगा. मुलायम सिंह यादव ((Mulayam Singh Died) के निधन के साथ ही भारतीय राजनीति के एक युग का अंत हो गया है. मुलायम सिंह की राजनीति से जुड़े कई किस्से हैं, जिन्होंने उस वक्त खूब सुर्खियां बटोरी थीं. ऐसा ही एक किस्सा उन पर जानलेवा हमला होने का है, जिसमें मुलायम सिंह यादव पर 9 गोलियां चलीं थी. 

इटावा में हुआ था जानलेवा हमला
4 मार्च 1984 को मुलायम सिंह यादव की इटावा में रैली थी. रैली के बाद मुलायम सिंह शाम में अपने एक दोस्त से मिलने महिखेड़ा पहुंचे और जब वहां से मैनपुरी के लिए रवाना हुए तो महिखेड़ा से निकलने के कुछ ही देर बाद उनकी गाड़ी पर गोलीबारी शुरू हो गई. दरअसल बाइक सवार दो हमलावरों ने मुलायम सिंह की गाड़ी पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दी थी और उनका निशाना मुलायम सिंह यादव थे. 

हालांकि मुलायम सिंह यादव के सुरक्षाकर्मियों की जवाबी कार्रवाई में एक हमलावर की मौके पर ही मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया था. सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह घेरा बनाकर मुलायम सिंह यादव को सुरक्षित नजदीक के कुर्रा पुलिस थाने ले गए. इस तरह मुलायम सिंह यादव की जान बच सकी थी. जिस वक्त मुलायम सिंह यादव पर हमला हुआ, उस वक्त यूपी की राजनीति में मुलायम सिंह यादव का कद तेजी से बढ़ रहा था. ऐसे में उनके विरोधियों ने उन पर हमले की साजिश रची थी. 

जब प्रधानमंत्री बनने से चूके थे मुलायम (Mulayam Singh was PM Candidate)
80 लोकसभा सीटें, 403 विधानसभा सीटें और 15 करोड़ से ज्यादा वोटर वाले उत्तर प्रदेश का भारतीय राजनीति में हमेशा से दबदबा रहा है. ये यूपी की राजनीति की ही ताकत थी कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव 1996 में देश के प्रधानमंत्री बनते बनते रह गए थे. दरअसल उस समय हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई थी और 161 सीटें जीतने वाली भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाई थी. हालांकि हालात ऐसे बने कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 13 दिनों में ही गिर गई. इसके बाद गठबंधन की सरकार बनने की बारी आई और वीपी सिंह, ज्योति बसु के नाम पीएम पद के लिए सामने आए लेकिन ये दोनों ही नेता रेस से बाहर हो गए तो मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव का नाम इस रेस में आगे हो गया. 

दिग्गज वामपंथी नेता हरकिशन सिंह सुरजीत ने मुलायम सिंह यादव के नाम की पैरवी की. हालांकि लालू प्रसाद यादव और शरद यादव के विरोध के चलते उनकी पीएम बनने की तमन्ना पूरी नहीं हो सकी. बाद में एचडी देवगौड़ा और आईके गुजराल पीएम बने और इनकी सरकार में मुलायम सिंह यादव रक्षा मंत्री रहे. हालांकि पीएम नहीं बनने की टीस हमेशा नेताजी के मन में रही.  

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