शरीर में दिखते हैं ये लक्षण तो इस तरह करें टाइप-1 डायबिटीज को नियंत्रित
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शरीर में दिखते हैं ये लक्षण तो इस तरह करें टाइप-1 डायबिटीज को नियंत्रित

Type-1 Diabetes Symptoms: टाइप-1 डायबिटीज एक क्रोनिक समस्या है जिसका इलाज संभव नहीं है. लेकिन इंसुलिन की सहायता से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है. 

शरीर में दिखते हैं ये लक्षण तो इस तरह करें टाइप-1 डायबिटीज को नियंत्रित

Type-1 Diabetes Symptoms: स्वास्थ्य जोखिमों में डायबिटीज वैश्विक स्तर पर बढ़ने लगा है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि देश में टाइप-1 डायबिटीज का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. इसे लेकर लोगों को अलर्ट भी किया गया है. वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में लगभग 84 लाख लोग टाइप-1 डायबिटीज के शिकार हुए. इसके साथ ही साल 2040 तक यह संख्या बढ़कर 1 करोड़ से अधिक होने की आशंका जताई गई है. 

आपको बता दें डायबिटीज के दो प्रकार होते हैं. एक टाइप-1 और दूसरा टाइप-2. टाइप-1 को इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज कहा जाता है. जिसमें आजीवन डायबिटीज रोगी को इंसुलिन शॉट्स की आवश्यकता होती है. वहीं टाइप-2 डायबिटीज में मरीज का शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता. इस तरह से दोनों तरह की डायबिटीज में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है. आइये जानते हैं समय से पहले डायबिटीज को किस तरह पहचानें और इसके मरीजों में क्या करना चाहिए. 

जानिए क्या है टाइप-1 डायबिटीज?
टाइप-1 डायबिटीज एक क्रोनिक समस्या है. इसमें शरीर में बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बनाता है. आपको बता दें इंसुलिन एक हार्मोन है जिसका उपयोग शरीर ग्लूकोज से ऊर्जा पैदा करने के लिए कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए करता है. सबसे गंभीर बात यह है कि टाइप-1 डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है. हां, लेकिन इंसुलिन शॉट्स देकर, आहार और जीवनशैली को सही रखकर इसका उपचार किया जा सकता है. कभी-कभी डॉक्टर्स टाइप 1 डायबिटीज को मधुमेह का लक्षण भी बताते हैं. टाइप-1 मधुमेह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था के दौरान हो सकता है. 

जरूरी बातों पर दें ध्यान 
जैसा कि हमने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है. लेकिन इसकी जटिलताओं को रोकने के लिए मरीज को इंसुलिन के शॉट्स दिए जा सकते हैं. इसकी जटिलताओ का शरीर के प्रमुख अंगों पर असर पड़ता है जैसे हृदय, रक्त वाहिकाएं, तंत्रिकाएं, आंखे और गुर्दे. इंसुलिन देने के साथ ही लाइफस्टाइल में बदलाव करके भी इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है. वहीं अगर बार-बार पेशाब जाते हैं, थका हुआ और कमजोर महसूस करते हैं, अधिक प्यास या भूख लगती है ये लक्षण दिखाई देते हैं तो इससे सावधान होने की जरूरत है.  

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